ब्रेकिंग न्यूज़

Bihar Teacher News : बिहार में शिक्षकों के लिए खुशखबरी; मॉडल स्कूलों के लिए ट्रांसफर शुरू; शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव Bihar News : बिजली बिल पर बड़ा फैसला आज! इस दिन से बदलेंगी दरें, 125 यूनिट फ्री रहेगा या बढ़ेगा झटका? Bihar crime news : पटना में बालू माफियाओं का आतंक: पुलिस पर हमला, जवाब में चली गोली;4 ट्रैक्टर जब्त Bihar crime news : पुलिस-ग्रामीण खूनी भिड़ंत: गोली लगने से एक की मौत, तीन पुलिसकर्मी घायल BIHAR NEWS : कागजों में शराबबंदी, जमीन पर मौत का खेल! सारण कांड ने खोली पोल, जहरीली शराब से 5 मौत; ADG ने खुद की पुष्टि Bihar weather: कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना, जानिए आज कैसा रहेगा मौसम चनपटिया में गिरफ्तारी के दौरान बवाल, ग्रामीणों ने पुलिस को बनाया बंधक, गाड़ी में की तोड़फोड़ अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक, 400 की मौत 250 घायल, तालिबान का आरोप-पाकिस्तान ने बम गिराए तेज प्रताप यादव की पार्टी JJD में मिसेज इंडिया रनर-अप हुईं शामिल, कौन हैं मोनिका मनी जानिये? मुजफ्फरपुर: पारू थाना की महिला सिपाही की संदिग्ध मौत, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप, पति हिरासत में

Home / politics / 'किसी भी वर्ग में उपेक्षा लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं', UGC बिल...

'किसी भी वर्ग में उपेक्षा लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं', UGC बिल को लेकर मचे बवाल पर JDU ने स्टैंड क्लियर किया

UGC Bill 2026: यूजीसी बिल 2026 और नई गाइडलाइंस को लेकर जेडीयू का रुख सामने आया है. जेडीयू प्रवक्ता ने कहा है कि जाति आधारित भेदभाव के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है और इसपर कोर्ट का फैसला सर्वमान्य होगा.

27-Jan-2026 04:54 PM

By FIRST BIHAR

UGC Bill 2026: यूजीसी बिल 2026 को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का रुख सामने आया है। पार्टी के प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इस देश को संविधान दिया है, जिसमें हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में समाज के किसी भी वर्ग में उपेक्षा या नाराजगी की भावना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।


नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार “न्याय के साथ सबका विकास और सबका सम्मान” के सिद्धांत के रोल मॉडल हैं। यूजीसी के नए रेगुलेशन को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं और अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई है। न्यायपालिका का सभी सम्मान करते हैं, इसलिए अब इस मामले में न्यायपालिका का फैसला ही सर्वमान्य और महत्वपूर्ण होगा।


वहीं, यूजीसी की नई गाइडलाइंस ने उत्तर प्रदेश में सियासी पारा बढ़ा दिया है। भारतीय जनता पार्टी के कई पदाधिकारियों ने इसके विरोध में इस्तीफा तक दे दिया है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि जाति आधारित भेदभाव की एक गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और संस्थागत सुरक्षा से कुछ वर्गों को बाहर कर दिया गया है।


याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि मौजूदा स्वरूप में इन गाइडलाइंस को लागू करने पर रोक लगाई जाए और जाति आधारित भेदभाव को “जाति-तटस्थ और संविधान अनुरूप” तरीके से फिर से परिभाषित किया जाए। इसमें कहा गया है कि जाति के आधार पर भेदभाव की परिभाषा ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी भी जाति की पहचान वाले सभी पीड़ितों को समान सुरक्षा मिल सके।


साथ ही याचिका में केंद्र सरकार और यूजीसी को अंतरिम निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन नियमों के तहत बनाए गए ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन’ जैसी सुविधाएं बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए उपलब्ध हों।