बेतिया में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, 6 महीने पहले किया था अंतरजातीय विवाह Bihar Civil Court Exam : आज डाउनलोड करें बिहार सिविल कोर्ट प्यून परीक्षा का एडमिट कार्ड, जानिए किस दिन होगी परीक्षा नीतीश के बिना विधवा हो जाएगा बिहार, राज्यसभा जाने पर CM के बहनोई का बड़ा बयान Indian Railways update : 'अब आगे नहीं जाऊंगा ...',बीच रास्ते ALP ने रोक दी यात्रियों से भरी ट्रेन ; जानिए फिर क्या हुआ सेना में शामिल होने का सुनहरा मौका: अग्निवीर भर्ती 2026 में 25,000+ बंपर वैकेंसी, जानिए पूरी डिटेल Bihar Politics : 'नीतीश कुमार का कार्यकाल हमेशा से बेदाग रहा...', बोले अमित शाह- केंद्र आने से बिहार और देश दोनों को होगा फायदा नीतीश कुमार के फैसले से पैतृक गांव कल्याण बिगहा के लोगों में भारी नाराजगी, BJP को दे दी यह बड़ी चेतावनी नीतीश कुमार के फैसले से पैतृक गांव कल्याण बिगहा के लोगों में भारी नाराजगी, BJP को दे दी यह बड़ी चेतावनी UPI पेमेंट में बड़ा बदलाव: अब UPI ID या मोबाइल नंबर डालकर नहीं कर पाएंगे भुगतान, जानें नया तरीका BIHAR NEWS : बिहार में BJP का उदय ! पढ़िए JDU के आगे 'सीनियर' बनने की पूरी टाइमलाइन; कब कैसे बदली रणनीति
05-Mar-2026 12:30 PM
By FIRST BIHAR
Nitish Kumar: नीतीश कुमार के सीएम की कुर्सी छोड़ने और राज्यसभा जाने के ऐलान के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। विपक्ष इसे बीजेपी की साजिश करार दे रहा है तो वहीं जेडीयू के कार्यकर्ता भी इस फैसले से हैरान हैं। इस सियासी खेल को लेकर विपक्ष ने हमला शुरू कर दिया है। लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने नीतीश कुमार को अपनी बदहाली के लिए जिम्मेवार बताया है।
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है। उन्होंने लिखा, "अपनों" के साथ बारम्बार बेवफाई करने वाले नीतीश कुमार जी .. खुद के गर्त में धकेले जाने और अपनी बदहाली के आप खुद जिम्मेदार हैं आपके साथ आज जो हो रहा आप उसके ही हक़दार हैं।
आज अवसरवादिता के शिखर पुरुष श्री नीतीश कुमार जी को जैसा निर्णय लेने के लिए भाजपा के द्वारा मजबूर किया गया , ये तो 28 जनवरी, 2024 को ही तय हो गया था , जब नीतीश कुमार जी ने गुलाटी मारने की अपने जगजाहिर कौशल की पुनरावृत्ति करते हुए महागठबंधन/इंडिया अलायन्स का साथ छोड़ा था.. कुर्सी से चिपके रहने की अपनी स्वभावतः मज़बूरी की वजह से ही आज नीतीश कुमार जी उस भाजपा के हाथों की कठपुतली बन चुके हैं, जो अपने सहयोगियों की राजनीतिक कब्र खोदने और उनको दफनाने के लिए ही जानी जाती है।
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे जी का जो हश्र भाजपा ने किया, नीतीश कुमार जी उससे भी नहीं चेते और अपने पुराने समाजवादी साथियों के बार-बार आगाह करने के बावजूद खुद ही कब्र सरीखी भाजपा की गोद में जा बैठे।
अपने ही विनाश के लिए भाजपा के द्वारा जारी तुगलकी फरमान पर अपनी रजामंदी देने वाले नीतीश कुमार जी के बारे में अब दो बातें तो जाहिर एवं साबित होती हैं "नीतीश कुमार जी की सोचने-समझने की शक्ति पूरी तरह से क्षीण हो चुकी है और नीतीश कुमार जी की कोई बहुत कमजोर नस भाजपा ने जरूर दबा रखी है"।