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RJD ने लगाया विवादित पोस्टर, कहा - मंदिर का मतलब पाखंड और अज्ञानता की ओर ले जाने वाला रास्ता, JDU ने कहा ... राजद को नहीं है वोट मांगने का अधिकार

01-Jan-2024 12:40 PM

By VISHWAJIT ANAND

PATNA : आरजेडी ने अपनी लड़ाई साफ कर दी है कि वह नए साल में बीजेपी की मंदिर राजनीति के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी। एक तरफ अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को होना है और आरजेडी के डेहरी से विधायक फतेह बहादुर सिंह ने राबड़ी देवी आवास के ठीक सामने एक पोस्टर लगाया है। इस पोस्टर के जरिए  मंदिर को अंधविश्वास, पाखंड, मूर्खता और अज्ञानता की ओर ले जाने वाला रास्ता बताया गया है। 


इस पोस्टर में लिखा गया है कि- मंदिर का मतलब मानसिक गुलामी का मार्ग और स्कूल का मतलब होता है जीवन में प्रकाश का मार्ग। जब मंदिर में घंटी बजती है तो हमें संदेश देती है कि हम अंधविश्वास, पाखंड, मूर्खता और अज्ञानता की और बढ़ रहे हैं। और जब स्कूल में घंटी बजती है तो यह संदेश मिलता है कि हम तर्कपूर्ण ज्ञान और वैज्ञानिकता व प्रकाश की ओर बढ़ रहे हैं। अब तय करना है कि आपको किसी और जाना चाहिए?


मालूम हो कि, यह बातें सावित्री बाई फुले की तरफ से कही गई है। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह लाइन उस वक्त में लिखी गई है जब एक तरफ भाजपा राम मंदिर को लेकर पूरे देश के लोगों को एकजुट करने में जुटी हुई है।दूसरी तरफ राजद इस तरह के पोस्टर के जरिए लोगों को यह बताने में डटी हुई है कि मंदिर को राजनीतिक मुद्दा बनाने से भाजपा को कोई अधिक फायदा नहीं मिलने वाला है। लिहाजा भाजपा के लिए इस बार राम मंदिर के नाम पर वोट मांगना काफी फायदेमंद नहीं होने वाला है और इससे उसे कोई अधिक फायदा नहीं मिलने वाला है।


जानकारी हो कि, राजद के जिस विधायक के तरफ से यह पोस्टर लगाया गया है वह हमेशा से ही ब्राह्मणवाद पर बयान देने की वजह से चर्चा में रहे हैं। हाल में इन्होंने हिंदुओं के बड़े देवता ब्राह्मा जी पर सवाल उठाया था। साथ ही कहा था कि विद्या की देवी सरस्वती की जगह सावित्री बाई फुले की पूजा होनी चाहिए। सावित्री बाई फुले को फते बहादुर ने पोस्टर पर 'भारत की पहली शिक्षिका' कहा है। 


वहीं, इस पोस्टर पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की फोटो के साथ ही कई महापुरुषों की भी फोटो लगाई है। सावित्री बाई फुले की फोटो मध्य में है और बुद्ध, सम्राट अशोक, कबीर, रैदास, कर्पूरी ठाकुर, जगदेव प्रसाद, फातिमा बीबी, अब्दुल कयूम अंसारी, ललई सिंह यादव, फूलन देवी, पेरियार व भीम राव अंबेडकर की फोटो कतार में लगायी है।


इसके साथ ही , सबसे बड़ी बात यह कि इसका उद्घाटन करने वाले शिक्षा मंत्री डॉ. चंद्रशेखर ने रामचरित मानस की कई पंक्तियों पर सवाल उठाया था और रामचरित मानस के नफरत फैलाने वाला ग्रंथ कहा था। कहा था रामचरित मानस, मनुस्मृति और गोलवलकर की किताब समाज को बांटती है, हमें नफरत महान नहीं बनाएगा मोहब्बत महान बनाएगा।


उधर, इस मामले में जदयू के तरफ से पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने कहा है कि - जो हिंदू धर्म के खिलाफ बोलते हैं उनको उस घर में नहीं जाना चाहिए जिस घर में घंटी बजती है और हिंदू देवी देवताओं की पूजा होती है। ऐसे लोगों को उस घर से वोट मांगने का भी अधिकार नहीं होना चाहिए। इसके आगे उन्होंने कहा कि, हमारी पार्टी जदयू धर्म के ऊपर बोलने वाले का कभी भी समर्थन नही करती है। इसके साथ ही नीरज कुमार ने कहा है कि- फते बहादुर नाम के विपरीत आचरण है।