ब्रेकिंग न्यूज़

बिहार में फर्जी IPS बनकर वसूली करने वाला शातिर गिरफ्तार, NIA-CIA और BJP की जाली ID भी मिली बिहार में फर्जी IPS बनकर वसूली करने वाला शातिर गिरफ्तार, NIA-CIA और BJP की जाली ID भी मिली Bihar News: मुजफ्फरपुर में अपराध की साजिश बेनकाब… पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई, अवैध हथियार के साथ दो शातिर दबोचे बिहार में सनसनीखेज वारदात… पति और सौतेली मां ने रची खौफनाक साजिश, फांसी पर लटकाने की कोशिश; बच्चों की बहादुरी से बची मां की जान पटना में डॉक्टर से 10 लाख की रंगदारी मांगने वाला गिरफ्तार, पैसे नहीं देने पर हत्या की दी थी धमकी पटना में डॉक्टर से 10 लाख की रंगदारी मांगने वाला गिरफ्तार, पैसे नहीं देने पर हत्या की दी थी धमकी BJP विधायक के बेटे को रौब दिखाना पड़ा महंगा, जाम में हूटर बजाने पर SDM से भिड़े; फॉर्च्यूनर सीज BJP विधायक के बेटे को रौब दिखाना पड़ा महंगा, जाम में हूटर बजाने पर SDM से भिड़े; फॉर्च्यूनर सीज इलाज कराने आई बच्ची के साथ दरिंदगी… छपरा के अस्पताल में शर्मनाक वारदात, आरोपी कर्मी गिरफ्तार NSMCH बिहटा में तीन दिवसीय बीसीएमई कार्यशाला सम्पन्न, वर्कशॉप में 30 डॉक्टरों ने लिया हिस्सा

Home / news / पुलिसवाले को प्रमोशन नहीं दिया तो नीतीश सरकार को देना पड़ा जुर्माना, हाईकोर्ट...

पुलिसवाले को प्रमोशन नहीं दिया तो नीतीश सरकार को देना पड़ा जुर्माना, हाईकोर्ट का फैसला

04-Dec-2021 08:15 AM

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने 20 साल से रुका हुआ एक पुलिसकर्मी के प्रमोशन के मामले में जवाबी हलफनामा दायर नहीं करने पर राज्य सरकार पर 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है. न्यायाधीश पी बी बैजंत्री ने रमाकांत राम की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया. एकलपीठ ने 18 नवंबर को डीजीपी सह विभागीय प्रति कमेटी के अध्यक्ष को हलफनामा दायर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था. 


बता दें कोर्ट ने हलफनामा दायर कर स्पष्टीकरण मांगा था कि 23 सितंबर 1998 के समय से सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर के पद पर प्रोमोट हुए याचिकाकर्ता 26 सितंबर 1995 के प्रभाव से प्रमोशन के योग्य थे कि नहीं. एकलपीठ ने डीजीपी बिहार को यह भी जवाब मांगा था कि अगर याचिकाकर्ता का प्राति नहीं दी तो का हलफनामा दायर करने के लिए एक का समय दिया इसकी वजह क्या थी. 


याचिकाकर्ता ने 11 दिसंबर 1998 को पटना हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर कहा था कि वह 26 सितंबर 1995 के प्रभाव से प्रमोशन के योग्य है. इस समय से अनुसूचित जाति में आने वाले इसके जूनियरों की प्राति दी गई थी, जबकि याचिकाकर्ता को तीन साल के देरी के बाद प्रमोशन दी गई थी. याचिकाकर्ता बिहार के बंटवारे के बाद झारखंड कैडर का चुनाव किया था और इस तरह से याचिकाकर्ता झारखंड पुलिस का अधिकारी हो गया था.