ब्रेकिंग न्यूज़

अतिक्रमण हटाने गई जिला प्रशासन की टीम पर हमला, पथराव में नगर परिषद के इंस्पेक्टर घायल अतिक्रमण हटाने गई जिला प्रशासन की टीम पर हमला, पथराव में नगर परिषद के इंस्पेक्टर घायल मोकामा में अनंत सिंह का अंतरराष्ट्रीय महादंगल, देश-विदेश के 101 पहलवानों ने दिखाई ताकत; किसने मारी बाजी? मोकामा में अनंत सिंह का अंतरराष्ट्रीय महादंगल, देश-विदेश के 101 पहलवानों ने दिखाई ताकत; किसने मारी बाजी? मोकामा गंगा रेल पुल को लेकर आया बड़ा अपडेट, इस महीने से शुरू हो जाएगा परिचालन मोकामा गंगा रेल पुल को लेकर आया बड़ा अपडेट, इस महीने से शुरू हो जाएगा परिचालन अब गांव भी जिलों से हुए कनेक्ट, 2,362 किमी सड़कों से मुजफ्फरपुर में बदली विकास की तस्वीर अब गांव भी जिलों से हुए कनेक्ट, 2,362 किमी सड़कों से मुजफ्फरपुर में बदली विकास की तस्वीर बिहार में परिवहन विभाग की बड़ी उपलब्धि, 4191 करोड़ से ज्यादा राजस्व वसूल कर बनाया रिकॉर्ड बिहार में परिवहन विभाग की बड़ी उपलब्धि, 4191 करोड़ से ज्यादा राजस्व वसूल कर बनाया रिकॉर्ड

Home / news / पटना हाई कोर्ट से नहीं मिली ब्रॉडसन को राहत, कोर्ट ने कहा.. सरकार...

पटना हाई कोर्ट से नहीं मिली ब्रॉडसन को राहत, कोर्ट ने कहा.. सरकार की मांग वाजिब

09-Dec-2021 10:42 AM

PATNA : भोजपुर जिले में बालू बंदोबस्ती का मामला, ब्रॉडस कंपनी को देना होगा 139 से अधिक रुपए ब्रॉडसन की नोटिस को कोर्ट ने अमान्य घोषित किया. आपको बता दें कि भोजपुर जिले में बालू बंदोबस्ती को लेकर सरकार ने ब्रॉडसन कंपनी को 1 मई से सरकार को किस नहीं दिया है. 


ब्रॉडसन का कहना था कि बालू खनन का काम अप्रैल महीने में ही बंद हो गया फिर अक्टूबर तक की राशि और क्यों दें इसलिए वह कोर्ट में चले गए थे. जिस पर सुनवाई होते हुए जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह ने की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. और बुधवार को उन्होंने सुनाया. कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए सरकारी मांग को सही ठहराया. खनन विभाग ने बताया कि 2019 की नई नियमावली के अनुसार नई डाक में बालू खनन के लिए बीडर सफल तो हुए लेकिन पर्यावरण क्लीयरेंस नहीं मिलने से खनन में विलंब हो रहा था.


सरकार ने पुराने सेटली को एक्सटेंशन देकर खनन का काम जारी रखने के लिए कहा था. गत अप्रैल में पुराने सेटली ने खनन का काम करने से इनकार कर दिया. लेकिन विभाग ने कहा कि बंदोबस्ती अक्टूबर तक के लिए था. इसलिए उन्हें डिमांड नोटिस के अनुसार राशि देनी ही होगी. विभाग ने बताया कि उन्होंने कोर्ट से कहा था कि डिमांड नोटिस पूरी तरह नियम के अनुसार है. इसलिए याचिकाकर्ता किसी राहत का हकदार नहीं है.