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मौत के बाद भी सूर्खियों में शहाबुद्दीन, मकबरे को लेकर विवाद नहीं हो रहा है खत्म

13-Dec-2021 03:08 PM

PATNA : बिहार के बाहुबली ‘साहब’ यानि शहाबुद्दीन की मौत के बाद उनकी मकबरे को लेकर भी बखेड़ा खड़ा हो गया था. दिल्ली से जो खबर आ रही है उसके मुताबिक जिस कब्रिस्तान में उन्हें दफन किया गया था, वहां बैगर इजाजत के मकबरा बनाया जा रहा था. कब्रिस्तान कमेटी को इसकी खबर मिली तो इसका विरोध कर दिया, कमेटी को मनाने से लेकर रूतबा दिखाने की काफी कोशिश की गयी लेकिन बात नहीं बनी. बताया गया कि मकबरा बनाने पर कोर्ट ने रोक लगा दी है.


अब इस मामले में दो अलग-अलग तरह के बयान आ रहे हैं. इस मामले में शहाबुद्दीन परिवार के करीबी माने जाने वाले RJD के दो नेता अलग-अलग बयान दे रहे हैं. RJD नेता हामिद रजा उर्फ डब्लू खान का कहना है, 'साहब (मो शहाबुद्दीन) का भव्य मकबरा बनना चाहिए. वो सिर्फ अकलियत के नहीं, बल्कि पूरे समाज के नेता थे. उनके चाहने वालों ने उनकी याद में मकबरा बनाने के लिए देश के कोने-कोने से तरह-तरह के पत्थरों का इंतजाम किया है, लेकिन इसमें साजिश के तहत अड़चन पैदा की जा रही है.'


उन्होंने कहा, 'सरकार को चाहिए कि उनकी याद में बड़ा मकबरा बनाने की पहल की जाए. अगर सरकार पहल नहीं करती है तो उनके चाहने वाले खुद आगे की व्यवस्था करेंगे.' हालांकि, हामिद रजा ने यह नहीं बताया कि मकबरा न बनने देने की साजिश करने वाले लोग कौन हैं? वहीं दूसरी तरफ RJD के प्रदेश महासचिव अदनान अहमद सिद्दीकी ने रुकावट की खबर को अफवाह बताया है. उन्होंने कहा है, 'मकबरा का कार्य लगभग पूरा हो गया है. फाइनल टच देना बाकी है. परिवार में वैवाहिक कार्यक्रम होने के चलते विलंब हुआ है. मकबरा जल्द बनकर तैयार होगा.'


सूत्रों के अनुसार, अभी मकबरे की स्थिति वही है, जो जून में थी. पहले भी इसे बनाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था. बात दें शहाबुद्दीन के शव को दिल्ली गेट स्थित जदीद कब्रिस्तान में दफनाया गया था. जहां यादगार बनाने के लिए परिजनों ने कब्र को बनाने की कोशिश की. लेकिन इसकी जानकारी मिलते ही जदीद कब्रिस्तान कमेटी ने विरोध कर दिया. रोकने के बाद के बावजूद थोड़ा बहुत काम हुआ. वहीँ कमेटी ने पुलिस भी बुलवाई. लेकिन हंगामा बढ़ता देख परिजनों ने काम रुकवा दिया.


बताया जा रहा है कि मरहूम पूर्व सांसद के परिजन कब्र पर बड़ा मकबरा बनाना चाहते हैं. लेकिन कब्रिस्तान कमेटी के कानून और वक्फ बोर्ड ने इसकी इजाजत नहीं दी है. मामले में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक मो नेमतुल्लाह ने भी अपनी ओर से कोशिश की थी. लेकिन उसका कोई खास परिणाम नहीं निकला. दूसरी तरफ इस पूरे मामले पर पूर्व सांसद के परिवार का कोई भी सदस्य कुछ भी कहने से बच रहा है.


आपको बता दें दिल्ली के तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे शहाबुद्दीन कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। 1 मई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। उनके परिजन शव को बिहार के सीवान में पैतृक गांव प्रतापपुर में दफनाना चाहते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए इसकी इजाजत नहीं दी गई थी। आखिर में शहाबुद्दीन के शव को दिल्ली गेट के जदीद कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। बाद में इस पर खूब राजनीति भी हुई थी