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03-Oct-2023 07:24 PM
By FIRST BIHAR EXCLUSIVE
PATNA: बिहार सरकार ने जातीय जनगणना के आंकड़े 2 अक्टूबर को जारी कर दिये. ये आंकड़ा कितना सही है, इस पर बड़ा विवाद हो गया है. लेकिन सरकार आंकड़ो के दुरूस्त होने के दावे कर रही है. वैसे जातीय गणना के आंकड़े आने के बाद लालू प्रसाद यादव औऱ तेजस्वी यादव ने नारा दिया है-जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी. यानि जिस जाति की जितनी संख्या है उसे उतना सत्ता में उतनी साझेदारी मिलनी चाहिये. ऐसे में ये समझना जरूरी है कि आखिरकार कौन वो लोग हैं जो समाज के वंचित तबके की हकमारी कर खुद मलाई खा रहे हैं.
वोट अति पिछड़ों का, राज किसका है
बिहार सरकार ने जातीय गणना की जो रिपोर्ट जारी की है, उसके आंकडों को देखिये. सरकार ने बिहार के लोगों को 5 वर्गों में बांट दिया है. पिछड़ा, अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अनारक्षित. सरकार की रिपोर्ट कहती है कि इन पांचों वर्गों में सबसे ज्यादा तादाद अति पिछड़ों की है. बिहार में उनकी संख्या 36.01 प्रतिशत है. जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी का फार्मूला कहता है कि बिहार में सत्ता से लेकर सियासत में अति पिछड़ों को सबसे ज्यादा हिस्सेदारी मिलनी चाहिये. लेकिन हो क्या रहा है ये जानना दिलचस्प है.
लालू-तेजस्वी ने किसे दी हिस्सेदारी
लालू यादव औऱ उनके बेटे तेजस्वी यादव के नारे की हकीकत जानने के लिए हमने उनकी पार्टी से लेकर सरकार की पड़ताल की है. उसके बाद जो आंकड़ा निकल कर सामने आया, वह बेहद दिलचस्प है. ये आंकड़ा बताने के लिए काफी है कि 36 परसेंट अति पिछड़ो के हिस्से की मलाई कौन खा रहा है.
10 मंत्री में से 7 यादव, अति पिछड़ा सिर्फ एक
बिहार सरकार में लालू-तेजस्वी की पार्टी राजद के फिलहाल 15 मंत्री हैं. उसमें से 3 मुसलमान हैं, दो अनुसूचित जाति से आते हैं. बाकी 10 मंत्री बचे हैं, जो पिछड़े या अति पिछड़े वर्ग से आते हैं. इन 10 मंत्री में से 7 मंत्री यादव हैं. राजद के मंत्रियों में तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, रामानंद यादव, सुरेंद्र यादव, ललित कुमार यादव, चंद्रशेखर यादव और जितेंद्र कुमार राय यानि कुल 7 यादव जाति से आने वाले मंत्री हैं. पिछड़ों औऱ अति पिछड़ों के नाम पर तीन मंत्री और हैं. कुशवाहा जाति के एक मंत्री आलोक मेहता हैं. पिछड़ा वर्ग से राजद के एक औऱ मंत्री हैं-समीर कुमार महासेठ. वे सूड़ी जाति से आते हैं.
36 परसेंट अति पिछड़े समाज को लालू यादव और तेजस्वी यादव ने एक मंत्री पद दिया है. नोनिया जाति से आने वाली अनिता देवी बिहार सरकार में राजद कोटे से मंत्री हैं. दिलचस्प ये भी जानना है कि अनिता देवी को पिछ़ड़ा और अति पिछड़ा कल्याण विभाग दिया गया है, जिसमें मंत्री के पास करने के लिए शायद ही कोई काम होता है. राजद कोटे में आये सारे मलाईदार और बड़े विभाग एक ही जाति के मंत्रियों के पास सिमटा है. स्वास्थ्य, पथ निर्माण, ग्रामीण कार्य, नगर विकास, पीएचईडी, खान एंव भूतत्व, सहकारिता से लेकर शिक्षा जैसे भारी भरकम विभागों की जिम्मेवारी एक ही जाति के मंत्री संभाल रहे हैं.
राजद ने राज्यसभा में किन्हें भेजा
पिछले लोकसभा चुनाव में राजद के सारे उम्मीदवार हार गये, लिहाजा वहां उनका कोई सांसद नहीं है. लेकिन राज्यसभा में राजद के 6 सांसद हैं. ये सारे सांसद वही हैं, जिन्हें लालू यादव या तेजस्वी यादव ने खुद चुना. राजद के विधायकों की संख्या के आधार पर वे राज्यसभा पहुंच गये. RJD ने वहां किस वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया, ये जानना भी रोचक है. राज्यसभा में राजद के 6 सांसदों में से 3 सवर्ण हैं. कारोबारी अमरेंद्रधारी सिंह भूमिहार हैं तो मनोज झा मैथिल ब्राह्मण. राजद के एक औऱ सांसद हैं प्रेम गुप्ता जो हरियाणा के रहने वाले बनिया हैं. बिहार को छोड़ कर देश के ज्यादातर राज्यों में बनिया को सवर्णों में शामिल किया जाता है.
राज्यसभा में राजद ने दो मुसलमानों को सांसद बना कर भेजा है. एक हैं कटिहार मेडिकल कॉलेज के मालिक अशफाक करीम और दूसरे हैं फैयाज अहमद. फैयाज अहमद भी कई शिक्षण संस्थान चलाते हैं. ये भी जानना जरूरी है कि अशफाक करीम को जब राजद कोटे से राज्यसभा भेजा रहा था तो वे शायद पार्टी के मेंबर तक नहीं थे. उन्हें किस खासियत के कारण लालू यादव ने राज्यसभा भेजा था, इस पर चर्चायें होती रहती हैं.
पिछड़े और अति पिछड़े के नाम पर राजद ने राज्यसभा में सिर्फ एक महिला को भेजा है. लालू-राबड़ी की बड़ी बेटी मीसा भारती राजद की राज्यसभा सांसद हैं. राजद ने एक भी अति पिछड़े को राज्यसभा में नहीं भेजा, पिछड़े के नाम पर सिर्फ लालू-राबड़ी परिवार की मीसा भारती सांसद बन गयीं.
विधान परिषद में 12 में सिर्फ एक अति पिछड़ा
राज्यसभा के जैसे ही विधान परिषद के लिए भी चुनाव होता है. यानि विधायकों की संख्या के आधार पर विधान परिषद के सदस्य चुने जाते हैं. कुछ विधान पार्षद चुनाव के जरिये भी आते हैं. राजद के कुल 12 विधान पार्षद हैं. इनमें अति पिछड़ों की संख्या सिर्फ एक है. रामबली सिंह राजद के विधान पार्षद हैं जो कहार या चंद्रवंशी जाति से आते हैं.
राजद के संगठन में पिछड़ों-अति पिछड़ों की हिस्सेदारी
अब तक बात हो रही थी सत्ता की. लेकिन जानना ये भी होगा कि राजद ने अपने संगठन में पिछड़ों औऱ अति पिछड़ों को किस तरह की हिस्सेदारी दी. इसके लिए राजद के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची देखने लायक है. राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष यादव जाति से आने वाले लालू यादव हैं. राजद के चार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं- राबड़ी देवी, शिवानंद तिवारी, देवेंद्र यादव और उदय नारायण चौधरी. यानि चार राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में से दो यादव. कोई अति पिछड़ा नहीं, पिछड़े वर्ग की दूसरी जाति से भी कोई नहीं.
राजद की राष्ट्रीय कमेटी में 10 महासचिव बनाये गये हैं. इनमें पांच यादव हैं. राजद ने भोला यादव, जयप्रकाश नारायण यादव, कांति सिंह, ललित यादव और बीनू यादव को महासचिव बना रखा है. पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुनील सिंह राजपूत जाति से आते हैं.
यानि सत्ता ही नहीं बल्कि संगठन में भी राजद को अति पिछड़े पसंद नहीं आये. राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रधान महासचिव, महासचिव और कोषाध्यक्ष पद पर बैठे नेताओं में से कोई अति पिछड़ा नहीं है. जाहिर है सवाल उठ रहे हैं. जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी का नारा लगाने वालों को पहले अपनी सरकार और संगठन में इसे लागू करना चाहिये. लालू हों या तेजस्वी दूसरों के लिए तो नारे लगा रहे हैं लेकिन अपना हिसाब किताब क्या है, इसे नहीं देखा.