Bihar Crime News: बिहार में JDU का पूर्व जिला प्रवक्ता गिरफ्तार, वैशाली पुलिस ने यहां से किया अरेस्ट; क्या है मामला? Bihar Crime News: जंगल में पेड़ से लटके दो नर कंकाल मिलने से सनसनी, ऑनर किलिंग की आशंका Bihar News: सकरी और रैयाम में जल्द खुलेंगे सहकारी चीनी मिल, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश Bihar News: सकरी और रैयाम में जल्द खुलेंगे सहकारी चीनी मिल, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश पटना में NEET छात्रा की मौत पर उबाल: शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाहर महिला संगठनों का जोरदार प्रदर्शन, बुलडोजर एक्शन की मांग पटना में NEET छात्रा की मौत पर उबाल: शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाहर महिला संगठनों का जोरदार प्रदर्शन, बुलडोजर एक्शन की मांग PM Awas Yojana Gramin: पीएम आवास योजना से बदली बिहार के गांवों की तस्वीर, 12 लाख परिवारों को मिलेगा अपना घर PM Awas Yojana Gramin: पीएम आवास योजना से बदली बिहार के गांवों की तस्वीर, 12 लाख परिवारों को मिलेगा अपना घर Prayagraj Magh Mela: प्रयागराज माघ मेला में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे होने पर आभार सभा, संतों ने दिया सनातन संरक्षण का संदेश Prayagraj Magh Mela: प्रयागराज माघ मेला में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे होने पर आभार सभा, संतों ने दिया सनातन संरक्षण का संदेश
17-Nov-2020 07:24 AM
DELHI : देश के अंदर दागी जनप्रतिनिधियों का चुनाव रद्द करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला किया है. सुप्रीम कोर्ट ने दागियों का चुनाव रद्द करने के लिए केंद्र को कोई भी आदेश देने से स्पष्ट तौर पर इंकार करते हुए कहा है कि ये विधाई मुद्दे हैं, जो देश के संसद के विशेषाधिकार में आते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वह ऐसे मामले में सरकार को कोई आदेश नहीं देगा.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में दागी विधायकों और सांसदों के चुनाव को शून्य घोषित करने के लिए एक याचिका दायर की गई थी. इस याचिका में मांग की गई थी कि कोर्ट स्किन सरकार को यह निर्देश दें कि वह ऐसे जनप्रतिनिधि जिनके ऊपर अपराधिक मामले चल रहे हैं. उनका चुनाव रद्द करें.
याचिकाकर्ता की तरह से अपील की गई थी कि 5 साल या उससे अधिक की सजा होने की संभावना वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कारवाई की जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को आदेश देने से इनकार कर दिया है.
आपको बता दें कि देश में 4442 ऐसे नेता हैं, जिनके खिलाफ हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के अपराधिक मुकदमे चल रहे हैं. इनमें से लगभग ढाई हजार ऐसे विधायक और सांसद हैं, जिनके खिलाफ मुकदमे लंबित हैं.
इसी को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी. लेकिन कोर्ट ने इसे विधाई मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार को कोई दिशा निर्देश देने से मना कर दिया.