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बिहार में विकास का सच देखिये: नदी के बीचों बीच फंसी एम्बुलेंस, ट्रैक्टर के सहारे निकाल गया, लोगों ने कहा-यहां के सांसद-विधायक कुछ नहीं करते

21-Aug-2023 03:30 PM

By SONU

NAWADA: बिहार के चहुमुखी विकास का दावा करने वाली सरकार के सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बात नवादा की कर रहे हैं जहां सकरी नदी पर आज तक पुल नहीं बन पाया है। जिसके कारण यहां के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आए दिन इलाके के लोग सकरी नदी पर पुल बनाने की मांग करते हैं लेकिन इनकी मांगों को अनसुना कर दिया जाता है। सकरी नदी पार करने के दौरान आज एक एम्बुलेंस नदी के बीचों बीच फंस गयी। जिससे अफरा-तफरी मच गयी।


एम्बुलेंस में नवजात के साथ महिला सवार थीं। प्रसव के बाद महिला को अस्पताल से घर ले जाया जा रहा था। नदी के बीचो-बीच फंसे एम्बुलेंस को ट्रैक्टर की मदद से बाहर निकाला गया। जिसके बाद जच्चा-बच्चा को सुरक्षित मोटरसाइकिल से घर तक पहुंचाया गया। मामला नवादा के गोविन्दपुर प्रखंड का है। जहां एम्बुलेंस में सवार महिला डेलुआ गांव निवासी अरविंद की पत्नी ललिता देवी है। प्रसव के बाद ललिता देवी और नवजात को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दोनों जच्चा-बच्चा को परिजन लेकर घर जा रहे थे। एम्बुलेंस से इन्हें अस्पताल से घर ले जाया जा रहा था कि तभी सकरी नदी को पार करने के दौरान एम्बुलेंस बीच नदी में फंस गयी। जिसके बाद ट्रैक्टर की मदद से एम्बुलेंस को बाहर निकाला गया। 


बता दें कि सकरी नदी पर पुल नहीं रहने के कारण यहां आए दिन इस तरह की घटनाएं होती रहती है। बावजूद इसके सैकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सकरी नदी को पार करते हैं। लोगों को आवागमन में भारी परेशानी होती है। यहां के लोगों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी यहां के सांसद और विधायक दोनों को है लेकिन उन्हें यहां के लोगों की कोई चिंता नहीं है। 


लोगों का कहना है कि जब-जब चुनाव आता है तब-तब सकरी नदी पर पुल बनाए जाने का आश्वासन दिया जाता है लेकिन चुनाव जीतने के बाद सब भूल जाते हैं। पुल बनाए जाने की मांग यहां के सांसद और विधायक से की गयी लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हुआ। यहां के सांसद विधायक इस समस्या पर ध्यान ही नहीं देते हैं। जिसके कारण यहां के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने बताया कि सांसद और विधायक कहते हैं पुल बनाएंगे लेकिन कुछ नहीं करते हैं।