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18-Apr-2021 02:18 PM
PATNA:- जब कोरोना से किसी की मौत हो जाए और शव के अंतिम संस्कार के लिए भी एम्बुलेंस ना मिले तो इससे बड़ी लापरवाही क्या हो सकती है। पटना में यह मामला सामने आया है जहां मरीज की मौत के बाद परिजनों ने शव के दाह संस्कार के लिए अस्पताल प्रबंधक से एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन अस्पताल प्रशासन के द्वारा ना तो एंबुलेंस की व्यवस्था कराई गयी और ना ही मर्चरी वाहन की दिया गया। अस्पताल के आस-पास अन्य कोई हॉस्पीटल नहीं होने के कारण परिजन बार-बार गुहार लगा रहे थे लेकिन असफलता हाथ लगी। जिसके बाद परिजनों ने बाइक से ही शव को बांसघाट तक ले जाने का फैसला लिया और इसे लेकर तैयारी भी शुरू कर दी। लेकिन जैसे ही इस बात की सूचना डीएम कंट्रोल रूम को मिली सभी हरकत में आए गए। जिसके बाद आनन फानन में एंबुलेंस की व्यवस्था कर दी गयी। कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने बताया कि हॉस्पिटल प्रबंधन ने इस मामले में काफी लापरवाही बरती है। इस मामले की जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि पटना के मलाही पकड़ी निवासी 40 वर्षीय पुरुषोत्तम कुमार जो रेलवे में लोको पायलट के पद पर तैनात थे। बुधवार को बुखार और खांसी होने पर उन्हें दीघा-आशियाना रोड स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। शनिवार की सुबह डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर बताते हुए पटना AIIMS रेफर कर दिया। लेकिन पटना AIIMS में बेड खाली नहीं होने के कारण उन्हें निराशा हाथ लगी। जिसके बाद परिजनों ने PMCH, NMCH समेत कई अस्पतालों में एडमिट कराने का पूरा प्रयास किया। लेकिन सभी जगहों पर बेड खाली नहीं थे जिसके कारण मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया गया। थक हार कर परिजनों ने बिहटा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया। जहां शनिवार की दोपहर उनकी हालत गंभीर हो गई और इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
मरीज की मौत के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जारी टोल फ्री नंबर 104 और 102 और जिला नियंत्रण कक्ष में फोन किया और मर्चरी वाहन या एम्बुलेंस की मांग की लेकिन जब इसकी व्यवस्था नहीं की गई। तब परिजनों ने शव को बाइक से ले जाने की सूचना देते हुए इसकी तैयारी में भी जुट गये। तभी डीएम कंट्रोल रूम से परिजनों को फोन आया जिसमें यह कहा गया कि एम्बुलेंस की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन एंबुलेंस को पहुंचने में काफी देर हो गयी। जिसके बाद परिजन अपने पैसे से एंबुलेंस कर शव को बांस घाट ले गए।