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09-Oct-2023 04:01 PM
By First Bihar
DESK: जातीय गणना रिपोर्ट को लेकर बिहार में सवाल खड़े हो रहे है। इसी क्रम में राजद MLC प्रो. रामबली चन्द्रवंशी ने अपने ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रामबली चंद्रवंशी ने कहा है कि यह सेंसिटिव मामला है यदि पारदर्शी होता तो इस पर सवाल खड़े नहीं होते। जातीय गणना की जो रिपोर्ट बिहार सरकार ने जारी किया है वो सरकार के लिए ही गले का हड्डी साबित होगा।
रामबली चंद्रवंशी ने कहा कि जातीय गणना रिपोर्ट सत्य से परे है। नीतीश कुमार को इसकी जवाबदेही लेनी चाहिए। उन्होंने यह मांग किया कि रिपोर्ट को सही करवाकर वार्ड स्तर पर इसे सार्वजनिक किया जाए नहीं तो इस रिपोर्ट के खिलाफ हम सरकार से लड़ाई लड़ेंगे।
राजद एमएलसी प्रो. रामबली चन्द्रवंशी ने पटना में मीडिया के समक्ष अपनी बातें रखी। कहा कि जातीय गणना की रिपोर्ट यदि पारदर्शी होती तो आज इस तरह से सवाल खड़े नहीं होते। हमने भी मीडिया के माध्यम से अपनी बातें सरकार के समक्ष रखी है। पूरे चंद्रवंशी समाज में इसे लेकर भारी असंतोष है यह बात सरकार तक पहुंचना जरूरी है। मैं सच बात बोलता हूं और समाज की बात कहता हूं। समाज में जो बातें निकलकर सामने आई है उसे सरकार के सामने रखा है।
उन्होंने कहा कि जातीय गणना की रिपोर्ट जब जारी हुई थी तब हमने इसका स्वागत किया था लेकिन जब आंकड़ों में इतना अंतर देखा तो कही ना कही संशय की स्थिति उत्पन्न हो गयी। वही पिछड़ी और अतिपिछड़ी जातियों में भी इसे लेकर संशय बना हुआ है। चंद्रवंशी समाज में भी इसे लेकर खासा आक्रोश है। इस आक्रोश को दबाने का अब दो ही तरीका है। पहला यह कि भारत सरकार अविलंब कास्ट का कॉलम जोड़कर जनगणना कराए और दूसरा सही सर्वे करवाकर सरकार वार्ड स्तर पर रिपोर्ट को सार्वजनिक करे। जिससे किसी को आपत्ति ना हो। यह रिपोर्ट पारदर्शी कैसे बने यह बिहार सरकार की जिम्मेदारी है।
बता दें कि 2 अक्टूबर को बिहार सरकार ने जातीय गणना की रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें चंद्रवंशी (कहार, कमकर) जाति की आबादी राज्य भर में कुल 21 लाख 55 हजार 644 बताई गयी थी। इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद चंद्रवंशी समाज के लोगों में असंतोष देखा जा रहा है। ये लोग इस रिपोर्ट पर सवालिया निशान कड़ा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इथनोग्राफी अध्ययन सामान्य प्रशासन की ओर से एएन सिंह समाज अध्ययन संस्थान द्वारा 2013 में अध्ययन कराया गया था।
इथनोग्राफी रिपोर्ट में बताया गया है कि कहार जाति के लोग चंद्रवशी एवं रवानी नाम से भी जाने जाते हैं। अध्ययन में कहार या चंद्रवंशी जाति की आबादी 30 लाख 32 हजार 800 बतायी गयी थी। चंद्रवंशी जाति की सबसे अधिक आबादी एक लाख 55 आबादी गया जिले में बसती है। 2013 में 30 लाख 32 हजार 800 की आबादी थी 2023 में बिहार सरकार ने जो जातीय गणना रिपोर्ट जारी किया उसमें 21 लाख 55 हजार 644 जनसंख्या बतायी गयी है। करीब 9 लाख चंद्रवंशियों की संख्या जातीय गणना रिपोर्ट में कम दिखाया गया है। आखिर ये 9 लाख लोग कहां गये इसे लेकर अब सवाल उठने लगा हैं। राजद एमएलसी महाबली चंद्रवंशी भी इसे लेकर अपने ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और मुख्यमंत्री से इसका जवाब मांग रहे हैं।
DESK: जातीय गणना रिपोर्ट को लेकर बिहार में सवाल खड़े हो रहे है। इसी क्रम में राजद MLC प्रो. रामबली चन्द्रवंशी ने अपने ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रामबली चंद्रवंशी ने कहा है कि यह सेंसिटिव मामला है यदि पारदर्शी होता तो इस पर सवाल खड़े नहीं होते। जातीय गणना की जो रिपोर्ट बिहार सरकार ने जारी किया है वो सरकार के लिए ही गले का हड्डी साबित होगा।
रामबली चंद्रवंशी ने कहा कि जातीय गणना रिपोर्ट सत्य से परे है। नीतीश कुमार को इसकी जवाबदेही लेनी चाहिए। उन्होंने यह मांग किया कि रिपोर्ट को सही करवाकर वार्ड स्तर पर इसे सार्वजनिक किया जाए नहीं तो इस रिपोर्ट के खिलाफ हम सरकार से लड़ाई लड़ेंगे।
राजद एमएलसी प्रो. रामबली चन्द्रवंशी ने पटना में मीडिया के समक्ष अपनी बातें रखी। कहा कि जातीय गणना की रिपोर्ट यदि पारदर्शी होती तो आज इस तरह से सवाल खड़े नहीं होते। हमने भी मीडिया के माध्यम से अपनी बातें सरकार के समक्ष रखी है। पूरे चंद्रवंशी समाज में इसे लेकर भारी असंतोष है यह बात सरकार तक पहुंचना जरूरी है। मैं सच बात बोलता हूं और समाज की बात कहता हूं। समाज में जो बातें निकलकर सामने आई है उसे सरकार के सामने रखा है।
उन्होंने कहा कि जातीय गणना की रिपोर्ट जब जारी हुई थी तब हमने इसका स्वागत किया था लेकिन जब आंकड़ों में इतना अंतर देखा तो कही ना कही संशय की स्थिति उत्पन्न हो गयी। वही पिछड़ी और अतिपिछड़ी जातियों में भी इसे लेकर संशय बना हुआ है। चंद्रवंशी समाज में भी इसे लेकर खासा आक्रोश है। इस आक्रोश को दबाने का अब दो ही तरीका है। पहला यह कि भारत सरकार अविलंब कास्ट का कॉलम जोड़कर जनगणना कराए और दूसरा सही सर्वे करवाकर सरकार वार्ड स्तर पर रिपोर्ट को सार्वजनिक करे। जिससे किसी को आपत्ति ना हो। यह रिपोर्ट पारदर्शी कैसे बने यह बिहार सरकार की जिम्मेदारी है।
बता दें कि 2 अक्टूबर को बिहार सरकार ने जातीय गणना की रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें चंद्रवंशी (कहार, कमकर) जाति की आबादी राज्य भर में कुल 21 लाख 55 हजार 644 बताई गयी थी। इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद चंद्रवंशी समाज के लोगों में असंतोष देखा जा रहा है। ये लोग इस रिपोर्ट पर सवालिया निशान कड़ा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इथनोग्राफी अध्ययन सामान्य प्रशासन की ओर से एएन सिंह समाज अध्ययन संस्थान द्वारा 2013 में अध्ययन कराया गया था।
इथनोग्राफी रिपोर्ट में बताया गया है कि कहार जाति के लोग चंद्रवशी एवं रवानी नाम से भी जाने जाते हैं। अध्ययन में कहार या चंद्रवंशी जाति की आबादी 30 लाख 32 हजार 800 बतायी गयी थी। चंद्रवंशी जाति की सबसे अधिक आबादी एक लाख 55 आबादी गया जिले में बसती है। 2013 में 30 लाख 32 हजार 800 की आबादी थी 2023 में बिहार सरकार ने जो जातीय गणना रिपोर्ट जारी किया उसमें 21 लाख 55 हजार 644 जनसंख्या बतायी गयी है। करीब 9 लाख चंद्रवंशियों की संख्या जातीय गणना रिपोर्ट में कम दिखाया गया है। आखिर ये 9 लाख लोग कहां गये इसे लेकर अब सवाल उठने लगा हैं। राजद एमएलसी महाबली चंद्रवंशी भी इसे लेकर अपने ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और मुख्यमंत्री से इसका जवाब मांग रहे हैं।