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07-Jan-2026 05:08 PM
By Viveka Nand
Bihar News: सत्ताधारी पार्टी में एक ऐसे नेता हैं, जिनकी किस्मत का दरवाजा खुलने के कुछ समय बाद ही बंद हो गया. अभी तो सत्ता का आनंद लिए साल-डेढ़ साल ही गुजरे थे, अचानक सबकुछ स्वाहा हो गया. तब दल में नंबर-1 और सरकार में नंबर-2 की हैसियत थी. 2024 आते-आते पार्टी का फिर से भाग्योदय हुआ, पर नेताजी की किस्मत का ताला नहीं खुला. पद पाने की लालसा में नेताजी के तीन साल गुजर गए. लेकिन 2020-22 का वो दिन वापस नहीं लौटा. बेचारे करते क्या... अब वो कुर्सी-रूतबा मिलने से रहा. लिहाजा अपनी गाड़ी पर ही पूर्व नंबर-2 वाला पदनाम का बोर्ड लगवाकर घूम रहे. जनता जल्दी भूल जाती है...क्या पता हमें भी लोग भूल जाए , कभी वे भी नंबर-दो की हैसियत वाले थे. शायद इसी सोच के साथ नेताजी अपनी गाड़ी में नंबर-2 वाला पदनाम लगाकर घूमते हैं.
बंगले में नेताजी की होने लगी चर्चा
दरअसल, सत्ताधारी पार्टी के नेता (विधायक) तीन दिन पहले, उस बंगले में देखे गए, जो कभी उनका ही बंगला हुआ करता था. नंबर-2 की कुर्सी मिलने के बाद वो बंगला उन्हें अलॉट हुआ था. उस दिन नेताजी की गाड़ी भव्य बंगले में घुसी. गाड़ी पर नंबर-2 की कुर्सी वाला पदनाम ( आगे में पूर्व) लिखा था. गाड़ी में आगे की सीट पर नेताजी बैठे थे. नेताजी की गाड़ी बंगले के अंदर जाकर रूकी. अगल-बगल कई पूर्व-वर्तमान माननीय भी थे. जिनमें उनके दल और कई सहयोगी पार्टी के भी नेता थे. उनमें कई लोगों की निगाहें उनकी गाड़ी के आगे में लगी बोर्ड पर गई।
पूर्व नंबर-2 का बोर्ड लगाकर घूमते हैं नेताजी
नेताजी की गाड़ी के आगे में पूर्व पदनाम का प्लेट लगा था. यानि नंबर-2 वाली कुर्सी का पदनाम (पूर्व) का बोर्ड लगा था. कई लोग आश्चर्य में पड़ गए. इनकी ऐसी हालत हो गई जो अब इतने बड़े पदनाम का बोर्ड गाड़ी में लगाकर घूमना पड़ रहा ? वहां मौजूद लोग चर्चा करने लगे, गाड़ी पर बोर्ड लगाने से उस कुर्सी की भी गरिमा गिरा रहे, जिस पर कभी वो विराजमान थे. वर्तमान में उसी कुर्सी पर उनके ही दल के बड़े नेता विराजमान हैं.
पूर्व पदनाम वाला बोर्ड लगाकर ही खुश हैं नेताजी
बता दें, जिस नेताजी की बात कर रहे, उन्हें पार्टी ने 2020 में बड़ी जिम्मेदारी थी. हालांकि जब सत्ता का परिवर्तन हुआ तो नेतृत्व ने इनसे मुंह मोड़ लिया. सत्ता पलट होने के बाद इन्हें लगा था कि पार्टी उन्हें भूलेगी नहीं, नई जिम्मेदारी देगी. पार्टी विपक्ष में आई, फिर भी इन्हें जिम्मेदारी नहीं दी. पार्टी सत्ता में आई, इसके बाद भी इन्हें मुख्य धारा में नहीं रखा. बेचारे अब क्या करें...पूर्व पदनाम वाला बोर्ड लगाकर ही घूम रहे.