UTTAR PRADESH: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में एक अंतरधार्मिक प्रेम विवाह चर्चा का विषय बना हुआ है। जौनपुर की रहने वाली शाहजहां बानो ने अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाकर अपना नया नाम ‘प्रतीक्षा’ रखा और प्रतापगढ़ निवासी अपने प्रेमी पवन के साथ वैदिक रीति-रिवाज से विवाह कर लिया।
स्कूल से शुरू हुई थी दोनों की प्रेम कहानी
जौनपुर जिले के भीलमपुर गांव निवासी शाहजहां बानो और प्रतापगढ़ के भोजेमऊ गांव निवासी पवन की मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी। बाद में दोनों ने एक ही कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की, जहां उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। करीब 10 वर्षों तक दोनों संपर्क में रहे और एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का फैसला किया। हालांकि, दोनों अलग-अलग धर्मों से थे, इसलिए उनके परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुए।
परिवार की असहमति के बाद लिया शादी का फैसला
परिजनों की असहमति के बाद दोनों ने अपनी इच्छा से विवाह करने का निर्णय लिया। बालिग जोड़ों के विवाह की व्यवस्था की जानकारी मिलने पर वे बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंचे। आश्रम के पंडित केके शंखधार ने दोनों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, आयु संबंधी दस्तावेज और अन्य आवश्यक कागजात की जांच की। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद दोनों के बालिग होने की पुष्टि की गई।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ विवाह
प्रतीक्षा की इच्छा के अनुसार आश्रम में सनातन परंपरा के तहत सिंदूरदान, मंगलसूत्र और सात फेरों की सभी रस्में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न कराई गईं। विवाह के बाद दोनों ने जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।
आश्रम प्रमुख ने बताया कि यह उनके आश्रम में संपन्न कराया गया 251वां विवाह है। उन्होंने कहा कि आश्रम में केवल बालिग और अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करने वाले जोड़ों का ही विवाह कराया जाता है तथा सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच के बाद ही विवाह संपन्न कराया जाता है।