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23-Oct-2025 03:18 PM
By First Bihar
Bihar Assembly Election 2025 : बिहार की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया है, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बिहार का दौरा कर एक बार फिर “जंगलराज” को लेकर राजद की आलोचना की। इस पर तेजस्वी यादव ने एक ऐसा बयान दिया है, जो न सिर्फ नड्डा को करारा जवाब है बल्कि उनकी छवि सुधारने और विपक्षी हमलों का डेमेज कंट्रोल करने का भी एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है, तो कानून और व्यवस्था को सर्वोपरि रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि चाहे गलती उनकी हो या किसी अधिकारी या कर्मचारी की, कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। उनका यह बयान सीधे तौर पर यह संकेत है कि उनके शासन में कोई भी नियम-कानून से ऊपर नहीं होगा और किसी के लिए छूट नहीं रहेगी। तेजस्वी के इस बयान को राजनीतिक विशेषज्ञ डेमेज कंट्रोल और इमेज कीलिंग की दिशा में एक मास्टर स्ट्रोक के रूप में देख रहे हैं।
दरअसल, भाजपा की तरफ से तेजस्वी यादव को लेकर पिछले कुछ समय से “जंगलराज” की छवि बनाई जा रही थी। राज्य में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष लगातार हमला कर रहा था। इसी के बीच आज जेपी नड्डा का बिहार दौरा हुआ। नड्डा ने जोर देकर कहा कि अगर महागठबंधन सत्ता में आती है तो बिहार फिर से अराजकता और भ्रष्टाचार के चक्र में फँस सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों में भी राज्य में कानून और व्यवस्था का ढांचा कमजोर पाया गया था और इसे सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
जैसे ही नड्डा ने इस बयान को दोहराया, महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में घोषित कर उनकी राजनीतिक ताकत को स्पष्ट कर दिया। तेजस्वी का यह कदम उनके समर्थकों के लिए एक उत्साहवर्धक संदेश था। इसके साथ ही उन्होंने अपने पहले सार्वजनिक बयान में यह सुनिश्चित किया कि उनकी सरकार में कोई भी गैरकानूनी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्वी यादव ने जानबूझकर यह बयान इसलिए दिया है ताकि विपक्ष द्वारा बनाई गई नकारात्मक छवि को तुरंत चुनौती दी जा सके। उन्होंने संकेत दिया कि उनके शासन में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही या अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बयान उनके द्वारा खुद को एक जिम्मेदार और सख्त मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश करने की रणनीति का हिस्सा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह रणनीति तीन स्तरों पर काम कर रही है। पहला, यह नड्डा और भाजपा को जवाब देने का तरीका है। दूसरा, यह जनता के बीच तेजस्वी की छवि को सकारात्मक रूप से स्थापित करने का प्रयास है। और तीसरा, यह उनके ही दल और सहयोगी पार्टियों को यह विश्वास दिलाने की रणनीति है कि उनके नेतृत्व में राज्य में कानून और व्यवस्था सख्ती से लागू की जाएगी।
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी सरकार आते ही बीस दिनों के भीतर कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। इस बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि उनके शासन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, चाहे वह अधिकारी की हो या किसी कर्मचारी की, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका यह दावेदार बयान विपक्ष की बनायी गई नकारात्मक छवि को तोड़ने के साथ-साथ उनकी खुद की छवि को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया गया है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि तेजस्वी यादव की इस रणनीति में एक लंबी अवधि का राजनीतिक दृष्टिकोण भी शामिल है। चुनावों से पहले विपक्षी हमलों का सामना करते हुए यह बयान उनके लिए एक प्रबल हथियार साबित हो सकता है। यह उनके समर्थकों को यह विश्वास दिलाने का एक तरीका है कि तेजस्वी यादव सत्ता में आने पर जिम्मेदारीपूर्वक और सख्ती से शासन करेंगे।
इसके साथ ही, राजनीतिक समीक्षक यह भी कहते हैं कि यह बयान तेजस्वी की छवि को “कठिन लेकिन न्यायप्रिय नेता” के रूप में स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि उनके नेतृत्व में कोई भी गैरकानूनी या अनुचित गतिविधि बर्दाश्त नहीं होगी। इस रणनीति के तहत तेजस्वी ने विपक्ष और जनता दोनों को यह संदेश भेजा कि उनकी सरकार में कानून की सर्वोच्चता होगी और किसी के लिए नियमों के बाहर काम करने की छूट नहीं रहेगी।
बिहार की राजनीति में यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य में आने वाले चुनावों में यह मुद्दा मुख्य भूमिका निभा सकता है। तेजस्वी यादव ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनका नेतृत्व सख्त, जिम्मेदार और कानून के प्रति संवेदनशील रहेगा। इस बयान से महागठबंधन की साख मजबूत होने की संभावना है और विपक्ष पर दबाव भी बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, तेजस्वी यादव का यह बयान सिर्फ नड्डा को जवाब देने तक सीमित नहीं है। यह उनके राजनीतिक कौशल का प्रमाण है, जिसमें उन्होंने विपक्षी छवि को चुनौती देते हुए अपनी राजनीतिक मजबूती और सत्ता में आने पर जिम्मेदारी निभाने की प्रतिबद्धता जाहिर की। यह स्पष्ट संदेश है कि बिहार में महागठबंधन की सरकार आने पर किसी के लिए नियम और कानून के बाहर काम करना संभव नहीं होगा।