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04-Nov-2025 03:02 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर मोकामा में राजनीतिक पारा चरम पर है। चुनाव से पहले दुलारचंद हत्याकांड में अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद मोर्चा संभालने के लिए मोकामा के रण में उतरे केंद्रीय मंत्री ललन सिंह भी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। मोकामा में एक बयान को लेकर जिला निर्वाचन पदाधिकारी के आदेश पर ललन सिंह के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। उधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी ललन सिंह को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है।
दरअसल, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह मोकामा में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में ललन सिंह कथित तौर पर कहते हैं कि एक-दो नेता हैं, तो चुनाव के दिन इनको घर से मत निकलने दो। इनको घर में ही बंद कर दीजिए। फर्स्ट बिहार इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। इसको लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने ललन सिंह को नोटिस भेजा गया है और 24 घंटा के भीतर जवाब मांगा है। आइए हम आपको बताते हैं कि ऐसे मामलों में चुनाव आयोग क्या एक्शन ले सकता है।
ऐसे मामलों में चुनाव आयोग सबसे पहले आरोपी नेता या उम्मीदवार से स्पष्टीकरण मांगता है और नोटिस जारी करता है। यदि आरोपी की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तब चुनाव आयोग कानूनी कार्रवाई शुरू करता है। चुनाव आयोग चेतावनी जारी कर सकता है या चुनाव प्रचार पर रोक लगा सकता है। इतना ही नहीं दोषी पाए जाने पर उम्मीदवारों को आयोग अयोग्य भी घोषित कर सकता है।
भारतीय न्याय संहिता के तहत मतदाताओं को धमकाना एक गंभीर आपराधिक अपराध माना जाता है। इसके अंतर्गत मुख्य रूप से दो धाराएं लागू होती हैं।
धारा 174 – यह धारा अनुचित प्रभाव डालने को प्रतिबंधित करती है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति चुनाव में मतदाताओं या किसी अन्य व्यक्ति पर अनुचित प्रभाव डालता है या डराने-धमकाने का प्रयास करता है, तो उसे एक साल तक की कैद, जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
धारा 351 – यह धारा आपराधिक धमकी को वर्गीकृत करती है। यदि धमकी किसी व्यक्ति के शरीर, प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से दी जाती है, तो इसके लिए दो साल तक की कैद, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। गंभीर धमकी, जैसे मृत्यु या गंभीर चोट पहुँचाना, पर सात साल तक की सजा और जुर्माना बढ़ सकता है।
चुनाव आयोग की शक्तिया
भारतीय चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं। आयोग इन मामलों में नेताओं को निर्धारित अवधि के लिए प्रचार करने से प्रतिबंधित कर सकता है। धमकी की सूचना मिलने पर प्रभावित मतदान केंद्रों में मतदान निलंबित या रद्द किया जा सकता है।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के प्रावधान
यदि कोई उम्मीदवार गैरकानूनी तरीके से मतदाताओं को प्रभावित करता है, तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यह अधिनियम स्पष्ट रूप से रिश्वतखोरी, अनुचित प्रभाव, और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसे भ्रष्ट आचरण को परिभाषित करता है।
इन अपराधों के कारण न केवल अयोग्यता होती है, बल्कि आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है। इस प्रकार, भारतीय कानून और चुनाव आयोग दोनों ही मतदाताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रावधान रखते हैं।