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21-Oct-2025 08:58 AM
By First Bihar
Bihar Assembly Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का सियासी रण पूरी तरह सज चुका है। राज्य में सत्तासीन और विपक्षी दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में सक्रिय हो चुके हैं। इस चुनाव में मुख्य रूप से एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। हर दल ने अपने स्टार प्रचारकों के जरिए जनता तक अपनी नीतियों और एजेंडों को पहुंचाने की पूरी तैयारी कर ली है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनावी प्रचार की शुरुआत मुज़फ्फरपुर से की है, जो कि उनके लिए रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। आज वे मीनापुर और कांटी विधानसभा क्षेत्रों में दो जनसभाओं को संबोधित करेंगे। दोपहर लगभग 1 बजकर 40 मिनट पर वे हेलीकॉप्टर से मीनापुर के रामकृष्णा हाई स्कूल स्थित हेलीपैड पर उतरेंगे। यहां से वे औराई, मीनापुर और गायघाट विधानसभा क्षेत्रों में एनडीए प्रत्याशियों के समर्थन में जनता को संबोधित करेंगे। मीनापुर में जनसभा के बाद मुख्यमंत्री कांटी विधानसभा क्षेत्र के लिए रवाना होंगे, जहां वे कांटी, पारू, बरूराज और साहेबगंज विधानसभा क्षेत्रों के एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में रैली करेंगे।
इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने मुख्य चुनावी एजेंडा यानी विकास, सुशासन और स्थिरता को प्रमुखता से उठाएंगे। ‘गुड गवर्नेंस’ का यह एजेंडा उन्हें बार-बार सत्ता तक पहुंचाने में सहायक रहा है। उनके इस प्रचार अभियान से स्पष्ट संदेश मिलता है कि एनडीए इस बार पूरी तैयारी और रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतरा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुज़फ्फरपुर से चुनाव प्रचार की शुरुआत करना नीतीश कुमार की रणनीति का अहम हिस्सा है। इससे उनके उम्मीदवारों और पार्टी के लिए एक मजबूत सियासी झटका देने की संभावना बढ़ जाती है। एनडीए का यह अभियान यह भी दिखाता है कि पार्टी चुनाव में मैदान पर पूरी ताकत के साथ है और जनता के सामने अपने शासनकाल की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने को तैयार है।
दूसरी ओर, महागठबंधन भी अपने स्टार प्रचारकों के साथ सक्रिय होकर चुनावी प्रचार में जुटा हुआ है। पार्टी ने भी पूरे राज्य में व्यापक रैलियों और जनसभाओं की योजना बनाई है ताकि वे एनडीए को कड़ी चुनौती दे सकें। इस बार चुनाव में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों दोनों में ही जनसंपर्क को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। महागठबंधन के प्रमुख नेता भी विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में जाकर जनता से समर्थन की अपील करेंगे।
चुनावी समीकरण इस बार काफी पेचीदा नजर आ रहे हैं। मतदाताओं के मन में विभिन्न मुद्दों और उम्मीदवारों के प्रति धारणाओं के आधार पर अंतिम फैसला 14 नवंबर को ही सामने आएगा। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार की जनता इस बार अपनी सत्ता की नैया को सही दिशा में ले जाने के लिए बहुत सतर्क रहेगी।
विकास, रोजगार, सुशासन और शिक्षा जैसे प्रमुख मुद्दे इस चुनाव में मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करने वाले हैं। इसके अलावा, नेताओं के व्यक्तिगत आकर्षण और जनसभाओं में उनकी उपस्थिति भी चुनावी परिणाम पर असर डाल सकती है। इस बार का चुनाव न सिर्फ एनडीए और महागठबंधन के बीच है, बल्कि यह जनता की पसंद और राजनीतिक चेतना को भी परखने का मौका है।
कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का मुकाबला बेहद रोमांचक और सियासी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुज़फ्फरपुर से शुरू हुई चुनावी यात्रा और महागठबंधन की रणनीतियाँ इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना रही हैं। अब जनता के फैसले का समय आ गया है, और 14 नवंबर को ही स्पष्ट हो जाएगा कि बिहार की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।