Patna Crime : कमरे में कंबल में लिपटी लाश, पंखे से लटका फंदा… पटना के हॉस्टल में छात्र की मौत ने खड़े किए कई सवाल Bihar News : राज्यसभा चुनाव से पहले NDA अलर्ट! विधायकों को दिया गया खास ‘मतदान मंत्र’; आज दोपहर होगा मॉक पोल LPG cylinder : कॉमर्शियल सिलेंडर को लेकर सरकार का बड़ा फैसला! शुरू हुआ यह काम, PNG पर शिफ्ट हों लोग BIHAR NEWS : सरकार की चेतावनी बेअसर! पटना में राजस्व अधिकारियों का ऐतिहासिक महा जुटान, कहा - हाई कोर्ट के आदेश को किया जा रहा दरकिनार Bihar Politics : Land For Jobs केस में नया मोड़! ED ने कोर्ट में रखे ऐसे सबूत, बढ़ सकती है लालू परिवार की मुश्किलें Patna Metro : पटना मेट्रो कॉरिडोर-2: रेलवे से NOC मिलने के बाद मोइनुल हक स्टेडियम से राजेंद्र नगर टर्मिनल तक तेज हुआ काम LPG Cylinder : PNG कनेक्शन वालों को LPG सरेंडर करना होगा! गैस संकट के बीच सरकार का बड़ा आदेश मुजफ्फरपुर रेल पुलिस की बड़ी कामयाबी: छपरा कचहरी कांड के अभियुक्त को 5 साल की सजा घरेलू गैस सिलेंडर का व्यवसायिक इस्तेमाल: सारण में 3 होटलों के खिलाफ FIR दर्ज मौका देखकर बदलने वाले को क्या कहते हैं? पंडित..मच गया बवाल
09-Aug-2025 09:51 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Crime News: बिहार में निजी क्षेत्र की फिनो पेमेंट्स बैंक लिमिटेड के 17 जिलों में संचालित 251 व्यापारिक खातों से 5.58 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने बायोमेट्रिक क्लोनिंग के जरिए ग्राहकों की आधार पहचान का दुरुपयोग करते हुए यह राशि निकाल ली।
इस घोटाले के खिलाफ बैंक ने बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एफआईआर संख्या 18/25 दर्ज कर ली गई है और जांच प्रारंभ हो गई है। बैंक के स्थानीय प्रबंधक मनीष रौशन द्वारा दर्ज शिकायत में बताया गया है कि केवल अररिया जिले में ही 140 खातों से 3.05 करोड़ की अवैध निकासी की गई।
इसके अलावा पूर्णिया में 49 खातों से 99.87 लाख और किशनगंज में 25 खातों से 69.82 लाख की निकासी की गई। अन्य जिलों जैसे कटिहार, गया, भागलपुर, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुंगेर, नवादा, पटना आदि में भी छोटे पैमाने पर ठगी की घटनाएं हुई हैं।
फिनो बैंक गांवों में आधार-इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के माध्यम से बैंकिंग सुविधा देता है। इसके तहत गांवों में व्यापार इकाइयां नियुक्त होती हैं जिन्हें आधार सत्यापन से जुड़ी बायोमेट्रिक मशीनें और सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए जाते हैं। इन्हीं इकाइयों से जुड़े ग्राहकों की गोपनीय जानकारी और बायोमेट्रिक डिटेल लीक होने के कारण यह फर्जी निकासी संभव हो पाई।
बैंक का आरोप है कि कई स्थानीय थानों ने पहले की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की, जिससे ठगी का दायरा बढ़ता गया। हालांकि बैंक की पहल और एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के बाद अब तक केवल 38.87 लाख की राशि ही रिकवर की जा सकी है।