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25-Jun-2025 01:57 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के सीतामढ़ी जिले के सुप्पी प्रखंड में मिड डे मील योजना में 2022 में हुए 17.86 लाख रुपये के घोटाले की परतें अब भी खुल रही हैं। इस मामले में सात प्रधान शिक्षकों ने 7.63 लाख रुपये की अवैध निकासी की राशि अब तक नहीं लौटाई है। जिलाधिकारी रिची पांडेय ने इन शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और सख्त वसूली के आदेश दिए हैं।
2022 में सुप्पी प्रखंड के 29 स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत परिवर्तन मूल्य के लिए आवंटित 17,86,574 रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया था। जांच में पाया गया कि प्रधान शिक्षकों ने फर्जी बिल, अतिरिक्त उपस्थिति और अनियमित खरीद के जरिए इस राशि का गबन किया। 29 में से 22 शिक्षकों ने प्रशासनिक दबाव में राशि लौटा दी, लेकिन सात शिक्षक (विजेंद्र राय, संजय कुमार, अनुज कुमार, अनिल कुमार, अजय कुमार, वीरेंद्र कुमार और शंभू राम) अब तक 7,63,546 रुपये लौटाने में नाकाम रहे हैं। इन शिक्षकों ने न तो राशि जमा की और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया।
जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार, निम्नलिखित सात स्कूलों के प्रधान शिक्षकों को कुल 7,63,546 रुपये लौटाने हैं:
मध्य विद्यालय सोनाखान (विजेंद्र राय): 1,81,735 रुपये
मध्य विद्यालय नरकटिया (संजय कुमार): 79,209 रुपये
मध्य विद्यालय हरपुर पिपरा (अनुज कुमार): 1,24,348 रुपये
मध्य विद्यालय कोठिया राय (अनिल कुमार): 1,77,754 रुपये
मध्य विद्यालय नरहा (अजय कुमार): 95,706 रुपये
मध्य विद्यालय गमहरिया (वीरेंद्र कुमार): 81,614 रुपये
मध्य विद्यालय गोसाईपुर (शंभू राम): 23,180 रुपये
ज्ञात हो कि इस मामले में पहले ही कई कार्रवाइयां हो चुकी हैं। MDM के ब्लॉक रिसोर्स पर्सन रितेश रंजन को अनियमितताओं के लिए बर्खास्त किया गया था। इसके अलावा पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कन्हैया कुमार देव को निगरानी विभाग ने 50,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। वे एक आरोपी को बचाने के लिए यह रिश्वत मांग रहे थे।
अब जिलाधिकारी रिची पांडेय ने साफ कर दिया है कि राशि न लौटाने वाले शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी। उन्होंने शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन शिक्षकों से राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए। DM ने यह भी कहा कि इस तरह की अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। प्रशासन ने स्कूलों में MDM योजना की निगरानी के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें डिजिटल उपस्थिति और ऑनलाइन बिलिंग को अनिवार्य किया गया है।