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27-Jan-2026 07:52 AM
By First Bihar
Bihar land record : बिहार सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार के क्षेत्र में एक और बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से जमीन से जुड़े दस्तावेजों की वेरिफिकेशन और सर्टिफाइड डिजिटल कॉपी प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और सरल बना दिया है। इस नई व्यवस्था से आम लोगों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और समय के साथ-साथ खर्च की भी बचत होगी।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य भूमि अभिलेखों की पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जीवाड़े पर रोक लगाना और नागरिकों को तेज़, भरोसेमंद डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना है। अब जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच, अपलोड और वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया घर बैठे की जा सकती है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदक को मोबाइल मैसेज के जरिए सूचना भी मिल जाएगी।
सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से इस नई डिजिटल प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की है। विभाग के अनुसार, यह प्रक्रिया भू-अभिलेख पोर्टल पर चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाती है, ताकि किसी भी तरह की गलती की संभावना कम हो और दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सके।
चरण 4: डॉक्यूमेंट अपलोड – भाग 1
इस प्रक्रिया के चौथे चरण में आवेदक को सबसे पहले भू-अभिलेख पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा। लॉग-इन करने के बाद “अपलोड” बटन पर क्लिक करना होगा, जिसके बाद एक नया फॉर्म खुलेगा। इस फॉर्म में कुछ जानकारियां पहले से भरी हुई होंगी, जिससे उपयोगकर्ता को सुविधा मिलेगी।
इस चरण में आवेदक को दस्तावेज के बॉक्स का बारकोड और फाइल का बारकोड दर्ज करना अनिवार्य होगा। बारकोड की यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि दस्तावेजों की पहचान और ट्रैकिंग आसान हो सके। सभी जानकारियां सही-सही भरने के बाद “नेक्स्ट” बटन पर क्लिक कर अगले चरण में बढ़ा जा सकता है।
चरण 5: डॉक्यूमेंट अपलोड – भाग 2
पांचवें चरण में आवेदक को अपने कंप्यूटर या लैपटॉप से जमीन से संबंधित स्कैन की गई हार्ड कॉपी दस्तावेज की पीडीएफ फाइल चुननी होगी। फाइल चयन के बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाली सभी जानकारियों को ध्यानपूर्वक दोबारा जांचना जरूरी होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सही दस्तावेज ही अपलोड किया जा रहा है।
इसके बाद नीचे दिए गए डिक्लेरेशन बॉक्स को चेक करना अनिवार्य है, जो यह पुष्टि करता है कि दी गई जानकारी सही और प्रामाणिक है। सभी स्टेप्स पूरे करने के बाद “अपलोड” बटन पर क्लिक करते ही दस्तावेज अपलोड की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
मैसेज के जरिए मिलेगी सूचना
डॉक्यूमेंट अपलोड होते ही पोर्टल पर तुरंत सफल अपलोड का संदेश दिखाई देगा। इसके साथ ही आवेदक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक एसएमएस भी भेजा जाएगा। यह मैसेज इस बात की पुष्टि करेगा कि दस्तावेज सफलतापूर्वक अपलोड हो गया है और वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
वेरिफिकेशन पूरी होने के बाद संबंधित वेरिफाइड डॉक्यूमेंट आवेदक के पोर्टल अकाउंट में उपलब्ध हो जाएगा। इसके बाद उपयोगकर्ता सामान्य प्रक्रिया का पालन करते हुए उस दस्तावेज की डिजिटल साइन की गई सर्टिफाइड कॉपी के लिए अनुरोध कर सकता है।
आम लोगों को होगा बड़ा फायदा
इस नई डिजिटल व्यवस्था से जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी। ग्रामीण इलाकों के लोगों, बुजुर्गों और कामकाजी नागरिकों के लिए यह सुविधा खास तौर पर लाभकारी साबित होगी, जिन्हें पहले छोटे-छोटे कामों के लिए भी अंचल कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे।
बिहार सरकार की यह पहल राज्य को डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में और मजबूत बनाती है। भू-अभिलेख पोर्टल पर लागू की गई यह नई प्रक्रिया न सिर्फ समय बचाएगी, बल्कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित, सत्यापित और आसानी से उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
Bihar land record : बिहार सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार के क्षेत्र में एक और बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से जमीन से जुड़े दस्तावेजों की वेरिफिकेशन और सर्टिफाइड डिजिटल कॉपी प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और सरल बना दिया है। इस नई व्यवस्था से आम लोगों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और समय के साथ-साथ खर्च की भी बचत होगी।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य भूमि अभिलेखों की पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जीवाड़े पर रोक लगाना और नागरिकों को तेज़, भरोसेमंद डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना है। अब जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच, अपलोड और वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया घर बैठे की जा सकती है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदक को मोबाइल मैसेज के जरिए सूचना भी मिल जाएगी।
सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से इस नई डिजिटल प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की है। विभाग के अनुसार, यह प्रक्रिया भू-अभिलेख पोर्टल पर चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाती है, ताकि किसी भी तरह की गलती की संभावना कम हो और दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सके।
चरण 4: डॉक्यूमेंट अपलोड – भाग 1
इस प्रक्रिया के चौथे चरण में आवेदक को सबसे पहले भू-अभिलेख पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा। लॉग-इन करने के बाद “अपलोड” बटन पर क्लिक करना होगा, जिसके बाद एक नया फॉर्म खुलेगा। इस फॉर्म में कुछ जानकारियां पहले से भरी हुई होंगी, जिससे उपयोगकर्ता को सुविधा मिलेगी।
इस चरण में आवेदक को दस्तावेज के बॉक्स का बारकोड और फाइल का बारकोड दर्ज करना अनिवार्य होगा। बारकोड की यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि दस्तावेजों की पहचान और ट्रैकिंग आसान हो सके। सभी जानकारियां सही-सही भरने के बाद “नेक्स्ट” बटन पर क्लिक कर अगले चरण में बढ़ा जा सकता है।
चरण 5: डॉक्यूमेंट अपलोड – भाग 2
पांचवें चरण में आवेदक को अपने कंप्यूटर या लैपटॉप से जमीन से संबंधित स्कैन की गई हार्ड कॉपी दस्तावेज की पीडीएफ फाइल चुननी होगी। फाइल चयन के बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाली सभी जानकारियों को ध्यानपूर्वक दोबारा जांचना जरूरी होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सही दस्तावेज ही अपलोड किया जा रहा है।
इसके बाद नीचे दिए गए डिक्लेरेशन बॉक्स को चेक करना अनिवार्य है, जो यह पुष्टि करता है कि दी गई जानकारी सही और प्रामाणिक है। सभी स्टेप्स पूरे करने के बाद “अपलोड” बटन पर क्लिक करते ही दस्तावेज अपलोड की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
मैसेज के जरिए मिलेगी सूचना
डॉक्यूमेंट अपलोड होते ही पोर्टल पर तुरंत सफल अपलोड का संदेश दिखाई देगा। इसके साथ ही आवेदक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक एसएमएस भी भेजा जाएगा। यह मैसेज इस बात की पुष्टि करेगा कि दस्तावेज सफलतापूर्वक अपलोड हो गया है और वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
वेरिफिकेशन पूरी होने के बाद संबंधित वेरिफाइड डॉक्यूमेंट आवेदक के पोर्टल अकाउंट में उपलब्ध हो जाएगा। इसके बाद उपयोगकर्ता सामान्य प्रक्रिया का पालन करते हुए उस दस्तावेज की डिजिटल साइन की गई सर्टिफाइड कॉपी के लिए अनुरोध कर सकता है।
आम लोगों को होगा बड़ा फायदा
इस नई डिजिटल व्यवस्था से जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी। ग्रामीण इलाकों के लोगों, बुजुर्गों और कामकाजी नागरिकों के लिए यह सुविधा खास तौर पर लाभकारी साबित होगी, जिन्हें पहले छोटे-छोटे कामों के लिए भी अंचल कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे।
बिहार सरकार की यह पहल राज्य को डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में और मजबूत बनाती है। भू-अभिलेख पोर्टल पर लागू की गई यह नई प्रक्रिया न सिर्फ समय बचाएगी, बल्कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित, सत्यापित और आसानी से उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएगी।