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Bihar Politics : राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक आज, क्या तेजस्वी संभालेंगे संगठन की कमान?

Bihar Politics : पटना में आज राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक हो रही है, जिसे बिहार ही नहीं बल्कि देश की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक का उद्घाटन पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव करेंगे।

Bihar Politics : राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक आज, क्या तेजस्वी संभालेंगे संगठन की कमान?

25-Jan-2026 08:26 AM

By First Bihar

Bihar Politics : पटना में आज राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक हो रही है, जिस पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। इस बैठक का उद्घाटन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव करेंगे। खास बात यह है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद लालू प्रसाद द्वारा गठित कमेटी की यह पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक है, ऐसे में इसके राजनीतिक मायने काफी गहरे माने जा रहे हैं।


बैठक में देश के 20 से अधिक राज्यों से प्रदेश अध्यक्ष, सांसद, विधायक और विधान परिषद के सदस्य शामिल हो रहे हैं। यही वजह है कि इसे सिर्फ बिहार तक सीमित कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि राजद की राष्ट्रीय राजनीति और भविष्य की रणनीति तय करने वाला मंच माना जा रहा है।


नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज

इस बैठक को लेकर सबसे बड़ी चर्चा पार्टी में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर है। माना जा रहा है कि इसी मंच से राजद में एक नए पद ‘राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष’ की औपचारिक घोषणा हो सकती है और इस पद की जिम्मेदारी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को सौंपी जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह राजद के इतिहास में एक अहम मोड़ होगा।


दरअसल, लालू प्रसाद यादव की सेहत पिछले कुछ वर्षों से लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। डॉक्टरों की सलाह के कारण उनकी सार्वजनिक और संगठनात्मक सक्रियता सीमित हो गई है। ऐसे में पार्टी के भीतर यह महसूस किया जा रहा है कि रोजमर्रा के राजनीतिक फैसलों और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए एक युवा, सक्रिय और पूर्णकालिक नेतृत्व की जरूरत है।


क्यों बनाया जा रहा है राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद?

इसी जरूरत को देखते हुए राजद में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पद के जरिए संगठन की व्यावहारिक कमान तेजस्वी यादव के हाथों में सौंपी जा सकती है, जबकि लालू प्रसाद पार्टी के सर्वोच्च मार्गदर्शक और वैचारिक नेता की भूमिका में बने रहेंगे।


तेजस्वी यादव पहले ही बिहार में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है। युवाओं, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए उन्हें स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जा रहा है।


मीसा भारती भी चर्चा में

हालांकि पार्टी के भीतर एक वर्ग ऐसा भी है जो राज्यसभा सांसद डॉ. मीसा भारती के नाम पर विचार करने की बात कर रहा है। समर्थकों का कहना है कि मीसा भारती को संगठनात्मक अनुभव है और वे राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में संतुलन साध सकती हैं। इसके बावजूद मौजूदा राजनीतिक संकेत तेजस्वी यादव के पक्ष में ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं। अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को ही लेना है और सभी की निगाहें उनके निर्णय पर टिकी हुई हैं।


कर्पूरी जयंती से मिले संकेत

कर्पूरी ठाकुर जयंती के मौके पर राजद कार्यालय में हुए कार्यक्रम में तेजस्वी यादव की सक्रिय भूमिका को भी नेतृत्व परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। अपने भाषण में तेजस्वी यादव ने कहा था कि “बिहार में लोक हारा है और तंत्र जीता है” और जनतंत्र को धनतंत्र के जरिए दबाया गया है। उन्होंने पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और बजट व संसद सत्र के बाद जिलावार दौरे का एलान भी किया था।


संगठन में अनुशासन पर भी मंथन

राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव के अनुसार, बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, आगामी चुनावी रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा पिछले चुनाव में दल विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं पर कार्रवाई और कुछ वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां देने पर भी फैसला हो सकता है।


क्या आज से शुरू होगा ‘तेजस्वी युग’?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आज की बैठक में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाता है, तो इसे राजद में ‘तेजस्वी युग’ की औपचारिक शुरुआत माना जाएगा। वहीं, लालू प्रसाद यादव पार्टी के मार्गदर्शक और संरक्षक की भूमिका में रहेंगे। कुल मिलाकर, आज की बैठक राजद के भविष्य की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।

Bihar Politics : पटना में आज राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक हो रही है, जिस पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। इस बैठक का उद्घाटन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव करेंगे। खास बात यह है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद लालू प्रसाद द्वारा गठित कमेटी की यह पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक है, ऐसे में इसके राजनीतिक मायने काफी गहरे माने जा रहे हैं।


बैठक में देश के 20 से अधिक राज्यों से प्रदेश अध्यक्ष, सांसद, विधायक और विधान परिषद के सदस्य शामिल हो रहे हैं। यही वजह है कि इसे सिर्फ बिहार तक सीमित कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि राजद की राष्ट्रीय राजनीति और भविष्य की रणनीति तय करने वाला मंच माना जा रहा है।


नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज

इस बैठक को लेकर सबसे बड़ी चर्चा पार्टी में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर है। माना जा रहा है कि इसी मंच से राजद में एक नए पद ‘राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष’ की औपचारिक घोषणा हो सकती है और इस पद की जिम्मेदारी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को सौंपी जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह राजद के इतिहास में एक अहम मोड़ होगा।


दरअसल, लालू प्रसाद यादव की सेहत पिछले कुछ वर्षों से लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। डॉक्टरों की सलाह के कारण उनकी सार्वजनिक और संगठनात्मक सक्रियता सीमित हो गई है। ऐसे में पार्टी के भीतर यह महसूस किया जा रहा है कि रोजमर्रा के राजनीतिक फैसलों और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए एक युवा, सक्रिय और पूर्णकालिक नेतृत्व की जरूरत है।


क्यों बनाया जा रहा है राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद?

इसी जरूरत को देखते हुए राजद में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पद के जरिए संगठन की व्यावहारिक कमान तेजस्वी यादव के हाथों में सौंपी जा सकती है, जबकि लालू प्रसाद पार्टी के सर्वोच्च मार्गदर्शक और वैचारिक नेता की भूमिका में बने रहेंगे।


तेजस्वी यादव पहले ही बिहार में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है। युवाओं, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए उन्हें स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जा रहा है।


मीसा भारती भी चर्चा में

हालांकि पार्टी के भीतर एक वर्ग ऐसा भी है जो राज्यसभा सांसद डॉ. मीसा भारती के नाम पर विचार करने की बात कर रहा है। समर्थकों का कहना है कि मीसा भारती को संगठनात्मक अनुभव है और वे राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में संतुलन साध सकती हैं। इसके बावजूद मौजूदा राजनीतिक संकेत तेजस्वी यादव के पक्ष में ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं। अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को ही लेना है और सभी की निगाहें उनके निर्णय पर टिकी हुई हैं।


कर्पूरी जयंती से मिले संकेत

कर्पूरी ठाकुर जयंती के मौके पर राजद कार्यालय में हुए कार्यक्रम में तेजस्वी यादव की सक्रिय भूमिका को भी नेतृत्व परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। अपने भाषण में तेजस्वी यादव ने कहा था कि “बिहार में लोक हारा है और तंत्र जीता है” और जनतंत्र को धनतंत्र के जरिए दबाया गया है। उन्होंने पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और बजट व संसद सत्र के बाद जिलावार दौरे का एलान भी किया था।


संगठन में अनुशासन पर भी मंथन

राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव के अनुसार, बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, आगामी चुनावी रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा पिछले चुनाव में दल विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं पर कार्रवाई और कुछ वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां देने पर भी फैसला हो सकता है।


क्या आज से शुरू होगा ‘तेजस्वी युग’?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आज की बैठक में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाता है, तो इसे राजद में ‘तेजस्वी युग’ की औपचारिक शुरुआत माना जाएगा। वहीं, लालू प्रसाद यादव पार्टी के मार्गदर्शक और संरक्षक की भूमिका में रहेंगे। कुल मिलाकर, आज की बैठक राजद के भविष्य की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।