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क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था पूरा लालू यादव परिवार: लैंड फॉर जॉब घोटाले में कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा-रेलवे को निजी जागिर बना दिया

लैंड फॉर जॉब्स घोटाले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि नौकरी के बदले जमीन लेने की व्यापक साजिश में लालू यादव और उनका परिवार आपराधिक सिंडिकेट की तरह शामिल था।

09-Jan-2026 05:50 PM

By First Bihar

DELHI: लैंड फॉर जॉब मामले में आज लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ कोर्ट का अहम फैसला आया. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस घोटाले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजप्रताप यादव, तेजस्वी यादव के साथ साथ लालू-राबड़ी की दो बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिये हैं. अब इन तमाम लोगों के खिलाफ ट्रायल होगा. 


लालू परिवार समेत इस मामले के दूसरे आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के मामले में कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणियां की. अदालत ने अपने अहम आदेश में कहा कि लालू यादव और उनके परिवार ने एक आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम किया और सरकारी नौकरियों को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया.


राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि लालू प्रसाद यादव की ओर से एक व्यापक साजिश (overarching conspiracy) रची गई, जिसके तहत रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले उनके परिवार के नाम पर जमीन और अचल संपत्तियां हासिल की गईं।


साजिश के पुख्ता संकेत

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टि में यह साबित होता है कि लालू यादव ने अपने पद (रेल मंत्री) का इस्तेमाल अपने परिवार यानि पत्नी, बेटियों और बेटों के नाम पर संपत्ति हासिल करने के लिए किया. जज ने यह भी कहा कि CBI की चार्जशीट से यह संकेत मिलता है कि लालू यादव के करीबी सहयोगियों ने भी इस पूरे घोटाले को अंजाम देने में मदद की.


कोर्ट ने लालू यादव और उनके परिवार की ओर से दायर डिस्चार्ज याचिकाओं को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया. लालू परिवार ने कोर्ट में अपने खिलाफ दायर चार्जशीट को खारिज करने के लिए डिस्चार्ज याचिकायें लगाई थीं. लेकिन कोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया.


इस मामले में कोर्ट ने लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजप्रताप यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, बेटी मीसा और हेमा के साथ साथ कई दूसरे आरोपियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के आरोप तय किए हैं. कुल 98 आरोपियों में से कोर्ट ने 52 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया है, जिनमें कुछ पूर्व रेलवे अधिकारी (CPOs) भी शामिल हैं. वहीं, 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है.


कितने लोग हैं आरोपी?

CBI के अनुसार, इस केस में कुल 107 लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन इनमें से पांच आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में 10 अक्टूबर 2022 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था.


क्या है CBI का आरोप?

CBI के मुताबिक, यह घोटाला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे. इस दौरान बिहार के कई लोगों को भारतीय रेलवे के विभिन्न जोनों—मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर—में ग्रुप-डी पदों पर नौकरी दी गयी.  जांच एजेंसी का आरोप है कि इन नियुक्तियों के बदले संबंधित उम्मीदवारों या उनके परिजनों ने अपनी जमीन लालू यादव के परिवार के सदस्यों या फिर एक निजी कंपनी AK Infosystems प्राइवेट लिमिटेड के नाम ट्रांसफर की। बाद में इस कंपनी पर भी लालू यादव के परिवार का नियंत्रण हो गया।


CBI का आरोप है कि लालू यादव ने बिना किसी कायदा-कानून के नौकरियां बांट दीं. इसके लिए ना कोई वैकेंसी निकाली गयी. ना ही कोई परीक्षा या इंटरव्यू हुआ. सीधे नियुक्ति पत्र थमा दिया गया. नौकरी के एवज में बड़े पैमाने पर जमीन की रजिस्ट्री लालू परिवार के नाम पर कराई गयी.