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14-Feb-2025 10:24 AM
By First Bihar
Bihar Teacher News: स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है। यहां बच्चों को यह बताया जाता है कि उन्हें किसके साथ किस तरह का आचरण रखना है। लेकिन, अब सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका और शिक्षक के बीच जमकर विवाद हुआ। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि दोनों ओर से जूते-चप्पल तक चलने लगे। अब इस घटना का तेजी से वीडियो वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार कैमूर में शिक्षा के मंदिर में प्रार्थना करने के दौरान प्रधानाध्यापिका और शिक्षक के बीच जमकर विवाद हुआ। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों ओर से जूते-चप्पल तक चलने लगे। अब इस घटना का तेजी से वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें स्पष्ट दिख रहा है कि दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत छांव पंचायत के प्राथमिक विद्यालय मधुरा की प्रधानाध्यापिका एवं शिक्षक के बीच आपस में अभद्र भाषा व अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। जूते-चप्पल चलाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा। वीडियों में साफ-साफ दिख रहा है। विद्यालय की महिला प्रधानाध्यापिका एवं पुरुष शिक्षक के बीच अभद्रभाषा और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जा रहा था।
वहीं, घटना के बाद छांव पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि गजानंद सिंह यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालय में शिक्षक एवं शिक्षिकाओं के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। बार-बार विद्यालय की महिला प्रधानाध्यापिक की शिकायत मिल रही थी। वहां पर जांच करने के दौरान पहुंचा तो आपस में ही प्रधानाध्यापिका एवं शिक्षक में झड़प हो रही थी।
इसके बाद एक-दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप महिला प्रधानाध्यापिका एवं पुरुष शिक्षक द्वारा लगाए जा रहे थे। इसके बाद मैंने मोहनियां अनुमंडल के एसडीएम राकेश कुमार सिंह और जिला शिक्षा पदाधिकारी अक्षय कुमार पांडेय से इस मामले की शिकायत की और आरोपियों पर कार्रवाई करने की अपील की। जबकि, इस मामले में प्रधानाध्यापिका ने बताया कि इस विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं सुबह 11:00 के बाद आते हैं। जब मैंने उनसे समय पर आने की अपील की और कहा कि अगर आपलोग समय पर नहीं आएंगे तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी? तो वह बेवजह हमसे उलझ गए। देखते ही देखते गाली-गलौज और मारपीट करने लगे। मैंने शिक्षा विभाग से न्याय की गुहार लगागई है।
इधर, शिक्षक ने आरोप लगाया कि प्रधानाध्यापिका हमलोगों को प्रताड़ित करती हैं। हमने जब खेलकूद का सामान मांगा तो हमारे जाति सूचक का नाम लेकर अभद्रभाषा और अमर्यादितभाषा मुझे बोलने लगीं। इतना ही नहीं वह बच्चों को भोजन तक नहीं देती हैं। पिछले तीन माह से मध्याह्न भोजन बंद है। मैंने इसकी शिकायत शिक्षा विभाग से की है।