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Bihar weather forecast : बिहार के इन दो जिलों में डॉप्लर वेदर रडार लगाएगा इसरो, जानिए क्या होगा फायदा; किसानों को भी मिलेगी यह सुविधा

इसरो बिहार के भागलपुर और पश्चिम चंपारण में डॉप्लर वेदर रडार लगाएगा। इससे बाढ़, चक्रवात, वज्रपात और मौसम की सटीक जानकारी पहले से मिल सकेगी।

18-Feb-2026 08:06 AM

By First Bihar

Bihar weather forecast : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो बिहार में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत राज्य के भागलपुर और पश्चिम चंपारण जिलों में अत्याधुनिक डॉप्लर वेदर रडार लगाए जाएंगे। इसके साथ ही आने वाले समय में भू-केंद्र (ग्राउंड स्टेशन) भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे मौसम संबंधी सटीक जानकारी और तेजी से उपलब्ध हो सकेगी।


यह जानकारी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र सैक-इसरो के निदेशक नीलेश एम देसाई ने पटना में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान दी। उन्होंने विधान परिषद सभागार में ‘अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और विकास की नई सीमा’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि इसरो की तकनीक बिहार में प्राकृतिक आपदाओं से बचाव में काफी सहायक साबित हो रही है।


उन्होंने बताया कि बिहार में नेपाल से आने वाली बाढ़ को लेकर इसरो के रडार पहले से बेहतर काम कर रहे हैं। इससे नेपाल में होने वाली भारी बारिश और संभावित बाढ़ की जानकारी समय रहते बिहार प्रशासन को मिल जाती है। इसके अलावा चक्रवात और तूफानों की सटीक जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इसरो के उपग्रह आम जनता की सुरक्षा और सुविधा के लिए लगातार बेहतर कार्य कर रहे हैं। सुनामी जैसी बड़ी आपदाओं और विभिन्न राहत अभियानों में भी इन उपग्रहों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


देसाई ने बताया कि इसरो बिहार मौसम सेवा केंद्र और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ मिलकर काम कर रहा है। खासकर आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं। आने वाले समय में बिजली गिरने की संभावना की जानकारी एक से दो घंटे पहले ही दी जा सकेगी, जिससे जान-माल की क्षति को कम किया जा सकेगा। इसके अलावा छठ पूजा और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन में भी इसरो की तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि डॉप्लर वेदर रडार मौसम विज्ञान का बेहद महत्वपूर्ण उपकरण है। यह केवल बादलों और बारिश की स्थिति ही नहीं बताता, बल्कि तूफान की दिशा और गति का भी सटीक अनुमान लगाने में सक्षम होता है। यह तकनीक बारिश की बूंदों की गति और हवा की दिशा को मापकर मौसम वैज्ञानिकों को समय से पहले चेतावनी जारी करने में मदद करती है। इसके जरिए भारी वर्षा, बादल फटने और तूफानों जैसी घटनाओं का भी पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। हवाई यात्रा के दौरान खराब मौसम और टर्बुलेंस से बचाने में भी यह तकनीक उपयोगी साबित होती है।


देसाई ने कहा कि इसरो का उद्देश्य विकसित देशों से प्रतिस्पर्धा करना नहीं, बल्कि पूरे भारत की भलाई के लिए वैज्ञानिक कार्यक्रम चलाना है। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार के साथ मिलकर पिछले तीन वर्षों से बाढ़, भूकंप, वज्रपात, शीतलहर, लू और आंधी-तूफान जैसी आपदाओं के पूर्वानुमान पर काम किया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा विश्लेषण की मदद से अब 15 दिन पहले ही चक्रवात और तूफानों की चेतावनी देना संभव हो रहा है।


कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इसरो की स्थापना और इसके संस्थापक डॉ. विक्रम साराभाई के योगदान पर भी प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने डॉ. सीवी रमण, डॉ. सतीश धवन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के योगदान को भी याद करते हुए कहा कि इन महान वैज्ञानिकों की मेहनत के कारण भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सका है।