Bihar Politics: बिहार में अतिवृष्टि, बाढ़ और ओलावृष्टि से फसल क्षति झेलने वाले किसानों को कृषि इनपुट अनुदान के लिए आवेदन करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी खामियों और ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति दर्ज करने का विकल्प नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए राजद किसान प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। उन्होंने पोर्टल की समस्याओं को दूर करने, आवेदन प्रक्रिया में ओलावृष्टि से हुई क्षति का विकल्प जोड़ने और आवेदन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।
सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में कहा कि सितंबर महीने में अतिवृष्टि और विभिन्न नदियों के बांधों के फाटक खोले जाने से जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई। इसके कारण बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। वहीं, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में ओलावृष्टि से भी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा। प्राकृतिक आपदाओं के चलते बड़ी संख्या में किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हुई हैं, जिससे उन्हें आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है।
राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। हालांकि, सांसद का आरोप है कि आवेदन पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है। तकनीकी समस्याओं के कारण किसानों को आवेदन भरने और जमा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सुधाकर सिंह ने आवेदन के लिए निर्धारित सात दिनों की समय-सीमा को भी अपर्याप्त बताया है। उन्होंने कहा कि जब पोर्टल में तकनीकी खामियां हैं और किसानों को आवेदन करने में परेशानी हो रही है, तो निर्धारित अवधि में सभी पात्र किसानों का आवेदन करना मुश्किल है। समय-सीमा नहीं बढ़ाए जाने पर कई किसान कृषि इनपुट अनुदान के लाभ से वंचित रह सकते हैं।
सांसद ने आवेदन प्रक्रिया में एक और गंभीर समस्या की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया है। उनके अनुसार, ऑनलाइन पोर्टल पर ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति दर्ज करने का स्पष्ट विकल्प उपलब्ध नहीं है। इसके कारण ओलावृष्टि से प्रभावित किसान अपनी फसल के नुकसान का सही विवरण आवेदन में दर्ज नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें सरकारी अनुदान का लाभ मिलने में कठिनाई हो सकती है।
सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से संबंधित विभाग को तत्काल आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को दूर कर आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही, ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति दर्ज करने का विकल्प जोड़ा जाए और किसानों को आवेदन के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित सभी पात्र किसानों को कृषि इनपुट अनुदान का लाभ मिल सके।





