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सुधाकर सिंह ने लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र, IPS कुंदन कृष्णन के मानहानि नोटिस पर उठाए सवाल; कर दी यह बड़ी मांग

Bihar Politics: RJD सांसद सुधाकर सिंह ने IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन के मानहानि नोटिस को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद ने जांच और मामला संसद की विशेषाधिकार समिति को भेजने का आग्रह किया है।

Bihar Politics
Mukesh Srivastava
5 मिनट

Bihar Politics: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ का मामला अब संसदीय स्तर पर पहुंच गया है। इस मामले को लेकर सवाल उठाने वाले राष्ट्रीय जनता दल के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए मानहानि के कानूनी नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद ने पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार मिलने पर इसे संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का आग्रह किया है।




सुधाकर सिंह के मुताबिक, आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन ने अपने निजी अधिवक्ता के माध्यम से उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है। सांसद का दावा है कि नोटिस में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के साथ पांच करोड़ रुपये के मानहानि वाद और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से इस मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध करते हुए कहा है कि वह संबंधित प्रकरण में अपने संसदीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। उन्होंने आशंका जताई है कि कानूनी नोटिस उन्हें इस मुद्दे को संसद में उठाने से रोकने का प्रयास हो सकता है। हालांकि, नोटिस भेजने के पीछे की मंशा को लेकर उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।




इस विवाद की पृष्ठभूमि भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ से जुड़ी है। सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में दावा किया है कि मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और मृतक की मां की शिकायत पर प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। सांसद के अनुसार, राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के लिए एक समिति गठित की है, लेकिन जांच के निष्कर्ष अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं।




सुधाकर सिंह ने मांग की है कि जांच का दायरा केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनका कहना है कि घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार एसटीएफ के महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे। ऐसे में आदेश जारी करने की प्रक्रिया, अधिकारियों के बीच संवाद, पुलिस मुख्यालय को मिली जानकारी और तत्कालीन नेतृत्व की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इन पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।




सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में संविधान के अनुच्छेद 105 का हवाला देते हुए संसदीय विशेषाधिकारों और सदन में स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के अधिकार का मुद्दा उठाया है। उनका तर्क है कि जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े मामलों पर सवाल उठाने का अधिकार है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया है कि कुंदन कृष्णन ने कानूनी नोटिस किस हैसियत से भेजा और क्या इसके लिए बिहार या केंद्र सरकार से किसी प्रकार की अनुमति ली गई थी। सांसद ने अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 17 का भी उल्लेख किया है। इसके साथ ही उन्होंने नोटिस भेजने में शामिल निजी विधि फर्म की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।




उन्होंने पूछा है कि संबंधित विधि फर्म केवल आईपीएस अधिकारी का निजी पक्ष रख रही थी या उसे बिहार सरकार की ओर से पक्ष रखने की भी अनुमति दी गई थी। सांसद ने इस संबंध में जारी आदेश और अनुमति के दायरे की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से पूरे प्रकरण की जांच कराने, पर्याप्त आधार मिलने पर इसे संसद की विशेषाधिकार समिति को भेजने और नोटिस जारी करने के लिए ली गई अनुमति से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उन्होंने न्यायिक जांच की मौजूदा स्थिति और उसके निष्कर्षों के बारे में भी जानकारी मांगी है।




सांसद ने यह भी अनुरोध किया है कि यदि जनप्रतिनिधियों के संसदीय दायित्वों के निर्वहन में दबाव या प्रतिशोध का कोई मामला सामने आता है, तो सदन की गरिमा और सदस्यों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं।अब इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष, आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन और अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता