DARBHANGA: जब सिस्टम से नाराज अधिकारी ही इस्तीफा देने लगे तो भला ऐसे सिस्टम में आम लोगों को पूछने वाला कौन होगा. मामला दरभंगा का है जहां बिहार प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी राजीव कुमार ने सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार से तंग आकर इस्तीफा दे दिया है.
सबका साथ, सबका विकास, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, और न जाने कितनी बातें और कितने दावे. लेकिन हकीकत देखिए. बिहार प्रशासनिक सेवा का एक अधिकारी आठ साल तक नौकरी करता है. यूं कहिए कि वो अधिकारी इन आठ सालों तक सिस्टम से जूझता है और आखिरकार जब सिस्टम से लड़ते-लड़ते हार जाता है तो इस्तीफा देकर अपनी नौकरी को ही बाय-बाय कर देता है.
जी हां. वर्तमान समय में दरभांगा डीटीओ का पद संभाल रहे राजीव कुमार नाम के इस अधिकारी ने जो इस्तीफा भेजा है उसके शब्दों पर अगर आप गौर करें तो यह साफ होता है कि लोग इस व्यवस्था में खुद को कितना असहाय महसूस करता है. राजीव कुमार लिखते हैं कि वो अपनी नौकरी के दौरान अपने आत्म सम्मान, स्वाभिमान और गरिमा की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं. वो आगे लिखते हैं कि वर्तमान समय वो राज्य और राष्ट्र की प्रगति में योगदान नहीं कर पा रहे हैं.
सेना का नौकरी छोड़कर इस सेवा से जुड़े अधिकारी राजीव कुमार ने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा है कि जिस मकसद से वो इस सेवा में आए थे वो मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है. सवाल बड़ा है और सोचने पर मजबूर भी करता है कि जब प्रशासनिक अधिकारी ही सिस्टम और भ्रष्टाचार के आगे खुद को मजबूर समझता है तो आखिर उन लाखों आम लोगों का क्या होगा जो दिन रात इसी व्यवस्था से जूझता है और खुद को मजबूर समझता है.
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस वाले सूबे में भ्रष्टाचार से ही परेशान हुआ DTO अधिकारी, सिस्टम से नाराज होकर दिया नौकरी से इस्तीफा
DARBHANGA: जब सिस्टम से नाराज अधिकारी ही इस्तीफा देने लगे तो भला ऐसे सिस्टम में आम लोगों को पूछने वाला कौन होगा. मामला दरभंगा का है जहां बिहार प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी राजीव कुमार

