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5 बार फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार, छठे प्रयास में विकास को मिली बड़ी सफलता, UPSC में AIR 27 किया हासिल

हरियाणा के किसान के बेटे विकास ने पांच असफलताओं के बाद हार नहीं मानी और छठे प्रयास में UPSC 2025 में ऑल इंडिया रैंक 27 हासिल कर मिसाल पेश की।

हरियाणा
परिवार में खुशी का माहौल
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

UPSC Success Story: हरियाणा के जींद जिले के छोटे से गांव गिल्लू खेड़ा के रहने वाले किसान के बेटे विकास ने अपने हौसले और मेहनत से यह साबित कर दिया कि असफलता सिर्फ सफलता की सीढ़ी होती है। पांच बार नाकाम रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और छठे प्रयास में UPSC 2025 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 27 हासिल कर शानदार सफलता पाई।


साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण सफर

विकास का जीवन एक साधारण ग्रामीण परिवेश में बीता, जहां ज्यादातर लोग खेती-किसानी तक सीमित रहते हैं। उनके पिता एक साधारण किसान हैं और परिवार में कोई भी उच्च शिक्षित नहीं था। बावजूद इसके, उनके माता-पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। विकास ने अपनी शुरुआती पढ़ाई डीएवी पब्लिक स्कूल, जींद से पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चले गए। दिलचस्प बात यह है कि सिविल सेवा में जाने का विचार उन्हें बचपन से नहीं था, बल्कि यह सपना कॉलेज के दौरान धीरे-धीरे आकार लेने लगा।


शुरुआती असफलताओं से सीखा सबक

दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की, लेकिन शुरुआती दो प्रयासों में वे प्रीलिम्स तक भी नहीं पहुंच सके। लगातार असफलताओं ने उन्हें जरूर झकझोरा, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों पर काम करना शुरू किया। वर्ष 2021 उनके लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और समझा कि केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सही दिशा में तैयारी भी जरूरी है।


छठे प्रयास के लिए खास रणनीति

लगातार पांच असफलताओं के बाद भी विकास का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया। उन्होंने टेस्ट सीरीज, आत्म-मूल्यांकन और कमजोरियों को सुधारने पर विशेष ध्यान दिया। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने अपने छठे प्रयास के बारे में परिवार को भी नहीं बताया, ताकि उन पर अतिरिक्त दबाव न बने। वे चुपचाप अपनी तैयारी में जुटे रहे और पूरी लगन के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।


मेहनत रंग लाई, मिला मुकाम

आखिरकार, जब UPSC 2025 का परिणाम घोषित हुआ, तो विकास का नाम 27वीं रैंक पर चमक रहा था। यह खबर जब उनके गांव पहुंची, तो खुशी की लहर दौड़ गई। उनके माता-पिता के लिए यह गर्व और भावुकता का पल था। जिस बेटे से वे अगले साल की उम्मीद कर रहे थे, उसने बिना बताए देश के टॉप 30 में अपनी जगह बना ली। विकास की यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो असफलताओं से निराश हो जाते हैं। यह दिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है।

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