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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है, मेडिकल कॉलेजे में दाखिले के मामले में फैसला

DELHI : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलने पर कोई ये दावा नहीं कर सकता कि आरक्षण मौलिक

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DELHI : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलने पर कोई ये दावा नहीं कर सकता कि आरक्षण मौलिक अधिकार है. जस्टिस ए. नागेश्वर राव की अगुआई वाले बेंच ने कहा कि एडमिशन में कोटा का लाभ नहीं मिलने का ये मतलब नहीं निकाला जा सकता कि संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है.


तमिलनाडु के मामले में कोर्ट का फैसला
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में आज तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेज में ओबीसी कोटे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान जस्टिस ए. नागेश्वर राव ने कहा  कि आरक्षण का अधिकार, मौलिक अधिकार नहीं है. ये कानून है. दरअसल तमिलनाडु के राजनीतिक दलों की ओर से दायर  याचिका में कहा गया था कि सूबे के मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी कोटे की सीटें रिजर्व नहीं रखी जा रही हैं. ये मौलिक अधिकारों का हनन है इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिये.


तमिलनाडु की सियासी पार्टियां गयी हैं कोर्ट
तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी कोटे को लेकर सीपीआई, डीएमके और कुछ नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया था सूबे के पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल कॉलेज और डेंटल कोर्स में ओबीसी कोटे के तहत 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की जाये. याचिका में कहा गया था कि तमिलनाडु में ओबीसी, एससी और एसटी के लिए 69 फीसदी रिजर्वेशन है और इसमें 50 फीसदी ओबीसी के लिए है.


याचिका में मांग की गई थी कि ऑल इंडिया कोटे के सरेंडर की गई सीटों में से 50 फीसदी सीटों पर ओबीसी उम्मीदवारों को प्रवेश मिले. याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि ओबीसी उम्मीदवारों को प्रवेश ना देना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है. उन्होंने रिजर्वेशन मिलने तक NEET के तहत काउंसिलिंग पर स्टे लगाने की भी मांग की थी.


आज सुप्रीम कोर्ट में इस पर लंबी सुनवाई हुई. कोर्ट याचिका दायर करने वालों के तर्कों से सहमत नहीं हुआ. कोर्ट ने पूछा कि जब आरक्षण के लाभ का कोई मौलिक अधिकार नहीं है तो कैसे अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका को बनाए रखा जा सकता है. कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पूछा कि  किसके मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है.  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32  सिर्फ मौलिक अधिकारों के हनन के लिए है.


सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने याचिका दायर करने वालों से कहा  ''हम मानते हैं कि आप तमिलनाडु के सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों की इच्छा रखते हैं, लेकिन आरक्षण का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है.”  कोर्ट ने इस बात की तारफी की कि अलग-अलग पार्टियां एक उद्देश्य के लिए साथ आ रही हैं. याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि तमिलनाडु सरकार आरक्षण कानून का उल्लंघन कर रही है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उन्हें मद्रास हाई कोर्ट जाने को कहा.


इससे पहले प्राइवेट नौकरी में आरक्षण को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में कहा था कि ऐसा कोई मौलिक अधिकार नहीं है कि प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण का दावा किया जा सके. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई अदालत राज्य सरकारों को आरक्षण देने के लिए आदेश नहीं दे सकती है. इसका फैसला सरकार खुद करे.