DESK : सोशल मीडिया पर महिलाओं को निशाना बनाने वाले बुल्ली बाई ऐप के जरिए आपत्तिजनक टिप्पणी करने और घृणा फैलाने में जुटे मुख्य साजिशकर्ता नीरज बिश्नोई असम से गिरफ्तार कर लिया गया है. गिरफ्तार नीरज बिश्नोई ने अपना जुर्म कबूल लिया है. पुलिस पूछताछ में उसने कई राज खोले हैं. उसने बताया है कि उसे धर्म विशेष से नाराजगी थी और वह उन महिलाओं को टारगेट करता था जो सोशल मीडिया में धर्म विशेष या विशेष आइडियोलॉजी को लेकर एक्टिव रहती थी. साथ ही उसने कहा कि मुझे इसका कोई पछतावा नहीं है.
IFSO यूनिट के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा के अनुसार मास्टरमाइंड नीरज बिश्नोई को असम के जोरहाट से गिरफ्तार किया गया था. वह कंप्यूटर साइंस से बीटेक सेकंड ईयर का छात्र है. नीरज ने यह बताया है कि बुल्ली बाई ऐप का वही क्रिएटर यानी इसे बनाने वाला है. पूछताछ में नीरज ने बताया कि उसी ने github पर बुल्ली बाई ऐप को बनाया था. साथ ही ट्विटर पर @bullibai_ एकांउन्ट भी उसी ने बनाया था.
नीरज ने पूछताछ में बताया कि github एकांउन्ट ऐप नंवबर 2021 में बनाया गया जो दिसंबर 2021 में ये ऐप अपडेट हुई थी. साथ ही इसने @sage0x1 नाम से ट्विटर एकाउंट भी बनाया था. नीरज ने यह कबूल किया है कि वह इस ऐप के मामले में सोशल मीडिया से खबरों पर नजर रखे हुए था. उसने एक और ट्विटर एकाउंट @giyu44 बनाया और उससे ट्वीट किया था कि मुंबई पुलिस ने गलत लोगों को गिरफ्तार किया है. वहीं इसी मामले के संबंध में मुंबई पुलिस ने बेंगलुरू और उत्तराखंड से गिरफ्तारी की थी. अब सूत्र के अनुसार ऐसा संभव है कि ये आरोपी आपस में सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में रहते हों. ऐसी जानकारी भी मिली है कि उत्तराखंड से गिरफ्तार ने एकाउंट बनाकर नीरज को दिया था जिसे वह हैंडल कर रहा था.
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क्या है पूरा मामला?
ट्विटर पर कुछ महिलाओं ने स्क्रीनशॉट्स शेयर करते हुए दावा किया था कि GitHub पर 'Bulli Bai' नाम के ऐप पर उन्हें 'नीलाम' किया जा रहा है. ऐप का नाम एक भद्दा टर्म है जिसे एक तबका मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रयोग करता है. इस ऐप पर सैकड़ों लड़कियों की तस्वीरें मौजूद हैं. नए साल के मौके पर सामने आए स्क्रीनशॉट्स के आधार पर एक महिला पत्रकार ने पुलिस में शिकायत की. विभिन्न दलों की महिला नेताओं ने भी इस मामले को उठाया और कार्रवाई की मांग की.
बता दें कि ऐसा ही एक मामला 2020 में भी सामने आया था. इसी प्लेटफार्म से पिछले साल जुलाई में सुल्ली डील का ऐप डाउनलोड किया गया था. दोनों ही मामलों में केवल मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों को निशाना बनाया गया है. उनकी तस्वीरें डाली गई हैं और लोगों से बोली लगाने के लिए कहा गया है.




