DESK : गिटहब ऐप को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा चुका है. गिटहब नाम के एक ऐप पर बुली बाई नाम से अज्ञात समूह द्वारा मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों को नीलाम किया जा रहा है. इसमें अधिकतर वो महिलाएं हैं जो सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव हैं और सरकार की आलोचना करती हैं. एप पर उनकी तस्वीरों को डाल कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और परेशान किया जा रहा है.
दरअसल, बुली बाई ठीक उसी तरह काम करता है जिस तरह कुछ दिन पहले सुली डील आया था. सुली डील को भी गिटहब पर लॉन्च किया गया था, अब बुली बाई को भी गिटहब पर लॉन्च किया गया है. सुली डील को लेकर भी काफी विवाद हुआ था. अब बुली बाई नाम से इसे फिर लांच किया है. इस ऐप पर ट्विटर और फेसबुक पर दमदार मौजूदगी रखने वाली 100 महिलाओं को टारगेट किया जा रहा है.
मीडिया समेत दूसरे फील्ड की महिलाओं ने इसकी कड़ी आलोचना की है. कई लोगों ने ट्विटर के जरिए इसे लेकर नाराजगी जाहिर की है. हालांकि, अपनी फोटो पब्लिक होने के बाद एक महिला पत्रकार ने दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में इसकी शिकायत भी दर्ज करवाई है.
वहीं कई राजनेताओं ने भी इसको लेकर आपत्ति जाहिर की है. और इसकी आलोचना की है. ट्विटर पर कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा, ''किसी को ऑनलाइन "बेचना" एक साइबर अपराध है और मैं पुलिस से तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान करता हूं. अपराधी दंड के पात्र हैं.'

महाराष्ट्र की शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बुली बाई को लेकर सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन साइटों को ब्लॉक कर दिया. सुली डील के बाद बुली बाई के आने को लेकर उन्हें 30 जुलाई और 6 सितंबर को सूचना एंव प्रसारण मंत्री को लेटर लिखा था, जिसका जवाब दो नवंबर को मिला.

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र के गृहमंत्री सतेज पाटिल ने भी बुली बाई को बहुत ही परेशान करने वाला और शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा, ''मैंने इसके लिए सख्त निर्देश दिया है और वे इस पर काम कर रहे हैं. हालांकि महाराष्ट्र साइबर पुलिस और मुंबई साइबर सेल ने पहले ही जांच शुरू कर दी है और इस संबंध में FIR दर्ज की जा रही है. निश्चिंत रहें, हम दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे.''



