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Bihar election: बागियों की बगावत से बढ़ी सियासी सरगर्मी, चार दर्जन सीटों पर दलों की नींद उड़ी

बिहार चुनाव 2025 में बागियों की बगावत ने सियासी दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस और हम के चार दर्जन सीटों पर बागी उम्मीदवार मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं।

Bihar election: बागियों की बगावत से बढ़ी सियासी सरगर्मी, चार दर्जन सीटों पर दलों की नींद उड़ी
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

BIHAR ELECTION: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार बगावत की आंधी ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की सियासत में भूचाल ला दिया है। पारी-बारी की बेचैनी और टिकट वितरण में असंतोष ने कई नेताओं को विद्रोही बना दिया है। परिणामस्वरूप, भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस और हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) जैसे बड़े दलों के लिए यह चुनाव रणनीतिक और साख की परीक्षा बन गया है। तकरीबन चार दर्जन सीटों पर बागी उम्मीदवार अधिकृत प्रत्याशियों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।


भाजपा ने बागियों को मनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने खुद कई नाराज नेताओं से मुलाकात की और उन्हें संगठन के प्रति वफादारी निभाने की सलाह दी। कई बागी नेताओं ने उनकी बात मानकर नामांकन वापस भी ले लिया, लेकिन कुछ अब भी मैदान में डटे हैं। भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि जिन सीटों पर बगियों की पकड़ मजबूत है, वहां त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन रही है। कई जगहों पर भाजपा के बागी उम्मीदवार मतों का बंटवारा कर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ सकते हैं।


राजद (राष्ट्रीय जनता दल) इस बार बगावत की सबसे बड़ी मार झेल रहा है। पार्टी ने अब तक 27 बागियों को निष्कासित कर दिया है। इनमें से कई नेताओं ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी ताल ठोक दी है।


परसा से पूर्व विधायक छोटे लाल राय जदयू के टिकट पर मैदान में हैं, जबकि गोविंदपुर से विधायक मो. कामरान निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ रहे हैं।


महिला राजद की प्रदेश अध्यक्ष रितू जायसवाल परिहार सीट से, सरोज यादव बड़हरा से, राजीव रंजन उर्फ पिंकू भइया जगदीशपुर से, अनिल यादव नरपतगंज से, अक्षय लाल यादव चिरैया से, और रामसखा महतो चेरिया बरियारपुर से निर्दलीय मैदान में हैं।


इसके अलावा भगत यादव शेरघाटी से, मुकेश यादव संदेश से, संजय राय महनार से, कुमार गौरव और राजीव कुशवाहा दरभंगा से, महेश प्रसाद गुप्ता जाले से, पूनम देवी गुप्ता मोतिहारी से, सुरेन्द्र प्रसाद यादव सोनपुर से, डॉ. राम प्रकाश महतो कटिहार से, प्रणव प्रकाश मधेपुरा से, और अफजल अली गौड़ाबौराम से निर्दलीय उम्मीदवार बने हुए हैं।


इन सभी बागियों पर राजद ने छह साल तक के लिए निष्कासन का डंडा चला दिया है और यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर वे पार्टी के झंडे या प्रतीक का इस्तेमाल करेंगे, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


जदयू भी अपने पुराने कार्यकर्ताओं की बगावत से जूझ रहा है। कई सीटों पर स्थानीय स्तर पर जदयू नेताओं ने पार्टी टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के अंदर भी असंतोष के स्वर सुनाई दे रहे हैं, खासकर उन सीटों पर जहां गठबंधन धर्म के तहत सहयोगी दलों को टिकट दिए गए हैं।


हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) ने दल-विरोधी गतिविधियों में शामिल 11 नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया है। इनमें से छह नेता बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं।


इनमें राजेश रंजन (घोसी), रितेश कुमार उर्फ चुन्नू शर्मा (जहानाबाद), नंदलाल मांझी (बोधगया), चंदन ठाकुर (समस्तीपुर), बीके सिंह (मैरवा) और राजेन्द्र यादव (कस्बा) शामिल हैं।


इसके अलावा लोजपा (रामविलास) के आर.के. रविशंकर प्रसाद अशोक सूर्यगढ़ा से निर्दलीय उम्मीदवार बने हुए हैं।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार की इस बार की लड़ाई केवल दल बनाम दल की नहीं, बल्कि “दल बनाम बागी” की भी है। कई जगहों पर बागी उम्मीदवार जातीय समीकरणों और स्थानीय प्रभाव के बल पर मुकाबला रोचक बना रहे हैं। कुछ सीटों पर वे अपने ही दल के आधिकारिक उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे विपक्षी पार्टियों को फायदा मिल सकता है।