Bihar Crime News: हत्या के पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा, भोज से लौट रहे युवक की पीट-पीटकर ले ली थी जान

Bihar Crime News: बेगूसराय की कोर्ट ने 2018 के हत्या मामले एक मामले में पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. दोषियों ने भोज से लौट रहे युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

1st Bihar Published by: HARERAM DAS Updated Tue, 24 Feb 2026 06:32:35 PM IST

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प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar Crime News: बेगूसराय जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 मनोज कुमार पंचम की अदालत ने वर्ष 2018 के चर्चित हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पांच आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पांचों ने भोज खाकर लौट रहे युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।


अदालत ने बीरपुर थाना क्षेत्र के मैदा बभनगामा निवासी रंजीत मालाकार, अनीता देवी, श्याम किशोर मालाकार, श्री राम एवं रामकिशोर मालाकार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक गोपाल साहू ने अदालत में 12 गवाहों की गवाही प्रस्तुत की। गवाहों के बयान, साक्ष्य एवं केस डायरी में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने सभी आरोपितों को हत्या का दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।


मामला 20 अप्रैल 2018 की रात करीब 11 बजे का है। प्राथमिकी के अनुसार, ग्रामीण सूचक निर्मल मालाकार का पुत्र मोहन मालाकार गांव में आयोजित एक भोज से लौट रहा था। इसी दौरान जब वह रंजीत मालाकार के घर के समीप पहुंचा, तो सभी आरोपितों ने उसे घेर लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।


आरोप है कि मारपीट के बाद मोहन मालाकार को जबरन घर के अंदर ले जाया गया, जहां उसके साथ बेरहमी से पिटाई की गई। शोर सुनकर जब उसके पिता निर्मल मालाकार मौके पर पहुंचे और अपने पुत्र को बचाने का प्रयास किया, तो उनके साथ भी मारपीट की गई।


बताया जाता है कि किसी तरह जान बचाकर निर्मल मालाकार गांव के मुखिया और सरपंच के पास पहुंचे तथा अपने बेटे को बचाने की गुहार लगाई। इसके बाद मुखिया व अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मोहन मालाकार को आरोपितों के घर से बाहर निकाला गया। गंभीर रूप से घायल मोहन को इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में काफी आक्रोश व्याप्त हो गया था।


घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपितों के खिलाफ अनुसंधान शुरू किया। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। पिछले कई वर्षों से मामले की सुनवाई चल रही थी। अंततः साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने पांचों आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।