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27 साल पुराने केस में बिहार की कोर्ट का बड़ा फैसला, हत्या के 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा; 5 की हो चुकी है मौत

Bihar Crime News: बेगूसराय में 27 साल पुराने हत्या कांड में कोर्ट ने 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. हालांकि लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण सुनवाई के दौरान पांच दोषियों की मौत हो चुकी है.

Bihar Crime News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Crime News: बेगूसराय व्यवहार न्यायालय ने 27 वर्ष पुराने बहुचर्चित हत्या मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 10 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार की अदालत ने बरौनी थाना कांड संख्या 238/1999 की लंबी सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया।


न्यायालय ने चकिया ओपी क्षेत्र के कसहा बरियाही निवासी दिनेश यादव, मकेश्वर यादव, सरवन यादव, रामविलास यादव, रमेश यादव, दशरथ यादव, रणवीर यादव, रणधीर यादव, निरंजन यादव एवं राम इकबाल यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149, 323, 147 एवं 148 के तहत दोषी करार दिया।


सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद अदालत ने सभी दोषियों को धारा 147 के तहत 2 वर्ष कारावास एवं 3,000 रुपये अर्थदंड, धारा 148 के तहत 3 वर्ष कारावास एवं 1,000 रुपये अर्थदंड, धारा 323 के तहत 1 वर्ष कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड, धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 10,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की राशि नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान रखा गया है।


अभियोजन के अनुसार, 4 अगस्त 1999 की सुबह लगभग 6 बजे सूचक रामाकांत यादव शौच के लिए घर से निकले थे। वापस लौटने के क्रम में दिनेश यादव ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। इसके करीब आधे घंटे बाद, सुबह लगभग 6:30 बजे, सभी आरोपित पिस्टल और लाठी से लैस होकर सूचक के घर पर चढ़ आए। 


आरोप है कि इस दौरान दयानंद यादव ने सूचक के पिता नांगो यादव के सिर पर जोरदार प्रहार कर दिया, जिससे उनका सिर फट गया। गंभीर रूप से घायल नांगो यादव जमीन पर गिर पड़े और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। घटना के दौरान सूचक एवं अन्य परिजनों के साथ भी मारपीट की गई। इसके बाद बरौनी थाना में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने अनुसंधान शुरू किया।


मुकदमे की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सिकंदर यादव, कपिल देव यादव, बौए लाल यादव, दयानंद यादव एवं श्याम सुंदर यादव की मृत्यु हो गई। उल्लेखनीय है कि नांगो यादव के सिर पर वार करने का मुख्य आरोप दयानंद यादव पर था, जिनकी सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो गई।


यह मुकदमा लगभग 27 वर्षों तक विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन रहा। सूचक पक्ष के अधिवक्ता रणविजय कुमार निराला ने मामले को निष्पक्ष सुनवाई के लिए कई बार ट्रांसफर पिटीशन दायर की। अलग-अलग अदालतों में सुनवाई के बाद अंततः जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार की अदालत ने अंतिम फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता दिलीप कुशवाहा ने कुल 15 गवाहों की गवाही कराई, जिनके आधार पर न्यायालय ने आरोपितों को दोषी ठहराया।


करीब तीन दशक बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत के इस निर्णय ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि कानून की पकड़ देर से सही, लेकिन मजबूत होती है।

रिपोर्टिंग
H

रिपोर्टर

HARERAM DAS

FirstBihar संवाददाता