Vikramshila Bridge : भागलपुर और आसपास के जिलों के लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से मरम्मत और सुरक्षा कार्यों के कारण प्रभावित विक्रमशिला सेतु पर जल्द ही वाहनों का परिचालन शुरू होने की संभावना जताई गई है। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि निर्माण कार्य तय समय पर पूरा हो जाता है तो 7 जून से पहले पुल पर यातायात बहाल किया जा सकता है।
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता हर हाल में सुरक्षित और सुचारु यातायात सुनिश्चित करना है। इसके लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की तकनीकी टीमें लगातार दिन-रात काम कर रही हैं। पुल पर अतिरिक्त बेली ब्रिज लगाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और सभी एजेंसियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
चौथे बेली ब्रिज की तैयारी शुरू
पुल की मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब एक और बेली ब्रिज तैयार करने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। वर्तमान में स्थापित संरचनाओं के अलावा चौथा बेली ब्रिज लगाए जाने से पुल पर वाहनों की आवाजाही और अधिक सुरक्षित हो सकेगी।
जिलाधिकारी ने बताया कि केवल बेली ब्रिज निर्माण ही नहीं, बल्कि पुल से जुड़े अन्य जरूरी कार्यों पर भी समानांतर रूप से काम चल रहा है। इसमें पहुंच पथ (एप्रोच रोड) को बेहतर बनाना, तकनीकी खामियों को दूर करना, सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक संरचनाएं स्थापित करना, सड़क संकेतक लगाना तथा ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करना शामिल है।
तकनीकी परीक्षण में सफल रहा बेली ब्रिज
शुक्रवार को पुल पर लगाए गए बेली ब्रिज की क्षमता और स्थिरता का आकलन करने के लिए विस्तृत तकनीकी परीक्षण किया गया। इस दौरान इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में चारपहिया वाहनों को अलग-अलग गति से पुल पर चलाकर उसकी मजबूती की जांच की गई।
टेस्टिंग के दौरान यह देखा गया कि सामान्य यातायात की स्थिति में पुल का व्यवहार कैसा रहता है और उस पर पड़ने वाले दबाव का असर कितना होता है। अधिकारियों के अनुसार परीक्षण के नतीजे संतोषजनक रहे और पुल निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित पाया गया।
40 किलोमीटर प्रति घंटा होगी अधिकतम गति
परीक्षण के दौरान यह निष्कर्ष सामने आया कि 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार में पुल पूरी तरह स्थिर और संतुलित बना रहा। हालांकि जब वाहनों की गति इससे अधिक की गई तो पुल में कंपन का स्तर बढ़ता हुआ दर्ज किया गया। इसी आधार पर विशेषज्ञों ने शुरुआती चरण में वाहनों की अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा रखने की सलाह दी है। प्रशासन का मानना है कि गति सीमा का पालन कराने से पुल पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा और यातायात भी सुरक्षित रहेगा। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों को विशेष निगरानी व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
विक्रमशिला सेतु बिहार के पूर्वी हिस्से की एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा माना जाता है। इसके माध्यम से भागलपुर सहित कई जिलों का संपर्क कोसी और सीमांचल क्षेत्र से जुड़ता है। पुल पर यातायात बाधित होने के कारण लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ रहा था, जिससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही थी।
अब यदि निर्धारित समय के भीतर सभी निर्माण और सुरक्षा संबंधी कार्य पूरे हो जाते हैं तो जून के पहले सप्ताह में ही लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। प्रशासन को उम्मीद है कि 7 जून से पहले पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी जाएगी और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था फिर से सामान्य हो जाएगी।





