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वैशाली विधायक का अपने ही गांव में हुआ विरोध, बिना शिलान्यास के वापस लौटे सिद्धार्थ पटेल

ग्रामीणों ने इसे "षड्यंत्र" करार देते हुए आरोप लगाया कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति के इस जमीन को बिजली विभाग को ट्रांसफर कर दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस भूमि पर कार्य शुरू किया गया तो वह उग्र आंदोलन करेंगे।

BIHAR
विधायक को ग्रामीणों ने लौटाया
© SOCIAL MEDIA
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

VAISHALI:  वैशाली विधानसभा के विधायक सिद्धार्थ पटेल को शुक्रवार को अपने ही पैतृक गांव नगवा में जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। यहां 33/11 केवी पावर सब स्टेशन के शिलान्यास कार्यक्रम में ग्रामीणों ने श्मशान भूमि पर निर्माण को लेकर भारी विरोध जताया, जिसके कारण विधायक को बिना शिलान्यास किए वापस लौटना पड़ गया। 


दरअसल वैशाली विधानसभा क्षेत्र के विधायक सिद्धार्थ पटेल को शुक्रवार को अपने पैतृक गांव नगवा में  विरोध का सामना करना पड़ा। यहां 33/11 केवी का नया पावर सब स्टेशन बनने का शिलान्यास होना था।कार्यक्रम के लिए विद्युत विभाग की ओर से मंच सजाया गया था और वरीय अधिकारी भी मौके पर पहुंच चुके थे। शिलान्यास विधायक पटेल के हाथों होना तय था, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण उन्हें कार्यक्रम स्थल से बिना शिलान्यास किए ही वापस लौटना पड़ा। 


हंगामा कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भूमि को उप केंद्र निर्माण के लिए चुना गया है, वह सदियों से श्मशान स्थल के रूप में उपयोग होती रही हैनइसी स्थान पर सरकारी शवदाह गृह भी बना हुआ है।ग्रामीणों का कहना था कि गांव के गरीब, लाचार और बीमार व्यक्तियों के शव का अंतिम संस्कार वर्षों से इसी भूमि पर किया जाता है। मुखिया प्रतिनिधि बिंदा प्रसाद सिंह के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने शिल्यनाश स्थल पर पहुंच विरोध प्रदर्शन किया। 


उन्होंने आरोप लगाया कि साजिश के तहत इस भूमि को विद्युत विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि इस भूमि पर निर्माण कार्य शुरू हुआ तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और किसी भी कीमत पर श्मशान भूमि पर उप केंद्र बनाने की अनुमति नहीं देंगे। विरोध बढ़ता देख विधायक को बैरंग लौटना पड़ा। इससे क्षेत्र में राजनीतिक तनाव का माहौल बन गया है।

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