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बिहार की लेडी डॉक्टर पर उपभोक्ता आयोग ने क्यों लगाया 20 लाख का जुर्माना? 13 साल बाद आया फैसला

Bihar News: बिहार राज्य उपभोक्ता आयोग ने अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने महिला डॉक्टर को चिकित्सा लापरवाही का दोषी मानते हुए पीड़ित पति को 20 लाख रुपये मुआवजा और 20 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है।

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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार के छपरा में इलाज में कथित लापरवाही से गर्भवती महिला की मौत के करीब 13 साल बाद बिहार राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने महिला डॉक्टर विमला शाही को लापरवाही का दोषी मानते हुए पीड़ित पति को 20 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 20 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी देना होगा।



मामला वर्ष 2013 का है। भगवान बाजार स्थित भूमिजा चिकित्सा केंद्र में नीरज कुमार जैन की पत्नी शालू जैन का इलाज चल रहा था। शिकायत के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान शालू को पेट में असहनीय दर्द था और गर्भ में पल रहे बच्चे की हलचल भी बंद हो गई थी। पति का आरोप था कि वह पत्नी को डॉक्टर विमला शाही के पास लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर ने शारीरिक जांच किए बिना पुरानी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर स्थिति सामान्य बता दी।



बताया गया कि 6 अक्टूबर 2013 को शालू की तबीयत दोबारा बिगड़ी और वह गंभीर दर्द की हालत में डॉक्टर के पास पहुंचीं। आरोप है कि उन्हें उचित उपचार नहीं मिला। हालत बिगड़ने के बाद परिजन उन्हें पटना के फोर्ड अस्पताल लेकर गए, जहां जांच में पता चला कि गर्भ में शिशु की पहले ही मौत हो चुकी थी और संक्रमण फैलने के कारण महिला की हालत गंभीर हो गई थी। इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2013 को शालू जैन की मौत हो गई।



पत्नी और अजन्मे बच्चे की मौत के बाद नीरज कुमार जैन ने वर्ष 2014 में उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। करीब 12 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद आयोग ने मामले में डॉक्टर को जिम्मेदार माना। बिहार राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि केवल अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर निर्भर रहना और मरीज की गंभीर स्थिति को नजरअंदाज करना चिकित्सा लापरवाही का गंभीर मामला है।



आयोग ने 'रेस इप्सा लोक्विटुर' के सिद्धांत को लागू करते हुए डॉक्टर को दोषी ठहराया। 1 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, डॉक्टर को 60 दिनों के भीतर पीड़ित पति को 20 लाख रुपये मुआवजा और 20 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देना होगा। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

रिपोर्ट- पवन कुमार सिंह, छपरा

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