ब्रेकिंग
बिहार में उच्च शिक्षा की खुली पोल: NIRF रैंकिंग में निराशाजनक प्रदर्शन, Top 100 में एक भी विश्वविद्यालय नहींइंटरनेशनल फेक करेंसी गैंग का सरगना बिहार से अरेस्ट, STF और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई; मिलिट्री इंटेलिजेंस के इनपुट पर एक्शनपटना में दिनदहाड़े युवक-युवती पर चाकू से हमला, वायरल वीडियो से मचा हड़कंपपाकिस्तान के क्वेटा में रेलवे ट्रैक के पास बड़ा धमाका, अबतक 23 की मौत; 47 लोग घायलWHO ने इबोला को घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, भारत ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरीबिहार में उच्च शिक्षा की खुली पोल: NIRF रैंकिंग में निराशाजनक प्रदर्शन, Top 100 में एक भी विश्वविद्यालय नहींइंटरनेशनल फेक करेंसी गैंग का सरगना बिहार से अरेस्ट, STF और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई; मिलिट्री इंटेलिजेंस के इनपुट पर एक्शनपटना में दिनदहाड़े युवक-युवती पर चाकू से हमला, वायरल वीडियो से मचा हड़कंपपाकिस्तान के क्वेटा में रेलवे ट्रैक के पास बड़ा धमाका, अबतक 23 की मौत; 47 लोग घायलWHO ने इबोला को घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, भारत ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी

एवरेस्ट तक पहुंचने वाली बिहार की पहली बेटी बनी लक्ष्मी, काला पत्थर पिक पहुंच फहराया तिरंगा

SAHARSA : बिहार के सहरसा का कोसी का ईलाका अपने शुरूआती दौर से ही समृद्धि और ज्ञान का भंडार रहा है। यहां एक से एक विभूतियों द्वारा सहरसा और कोसी का नाम देश दुनिया तक पहुंचाया

एवरेस्ट तक पहुंचने वाली बिहार की पहली बेटी बनी लक्ष्मी, काला पत्थर पिक पहुंच फहराया तिरंगा
Tejpratap
Tejpratap
3 मिनट

SAHARSA : बिहार के सहरसा का कोसी का ईलाका अपने शुरूआती दौर से ही समृद्धि और ज्ञान का भंडार रहा है। यहां एक से एक विभूतियों द्वारा  सहरसा और कोसी का नाम देश दुनिया तक पहुंचाया गया है। अब इसी कड़ी में जिले के बनगांव की बेटी लक्ष्मी झा ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वे मात्र 9 दिन के अंतराल में ही नेपाल स्थित काला पत्थर पिक और माउंट एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचकर तिरंगा झंडा को फ़हराया है। जिसके बाद वे एवरेस्ट तक पहुंचने वाली बिहार की पहली बेटी बनी है, जिससे जिले का नाम रौशन हुआ है।


बताया जाता है कि, लक्ष्मी झा के इस मुकाम तक पहुंचाने में उनकी मां सरिता देवी का काफी सहयोग रहा है। जिनकी प्रेरणा एवरेस्ट पर फतह करने में उनका सहायक बनी। दरअसल, बनगांव निवासी स्व० विनोद झा और सरिता देवी के चार बच्चों में सबसे छोटी लक्ष्मी झा जब बच्ची थी तभी उसके पिता की मौत हो गई। रोजी रोटी का कोई सहारा नहीं होने के कारण उसकी मां गांव के ही कई घरों में चूल्हा-चौका संभालकर परिवार की गाड़ी खिंचती रही। साथ ही चारों बच्चों का लालन-पालन भी करती रही। 


लक्ष्मी ने काफी मेहनत से पढ़ाई कर मैट्रिक और इंटर के बाद लिए बीए की परीक्षा पास किया। फिर ग्रुप डी की परीक्षा को पास कर पटना स्थित सचिवालय में सहायक कर्मचारी बनी। वर्ष 2019 में उन्होंने सचिवालय में नौकरी प्राप्त किया। जहां से वे अपने सपने एवरेस्ट पर चढ़ने की ओर कदम बढ़ाया। जिसके बाद उसके जिंदगी में बदलाव आया। उनका नामांकन उत्तराखंड स्थित पर्वतारोहण के नेहरू इंस्टिट्यूट में हुआ। जहां वर्तमान में हरियाणा में पदस्थापित डीएसपी अनीता कुंडुन से उनकी मुलाकात हुई। जिसके सहयोग और मार्गदर्शन से वे आगे बढ़ती रही। जिसके बाद बीते दिनों नेपाल स्थित काला पत्थर पिक और माउंट एवरेस्ट बेस कैंप की चढ़ाई को पूरा किया। हालांकि वे एवरेस्ट की शिखर तक नहीं पहुंची है। चूंकि एवरेस्ट शिखर तक जाने में 40 से 45 लाख रुपए के खर्च के साथ कड़े अभ्यास की आवश्यकता हैं। वे फिलहाल दोनों ही स्थिति में अपने आपको सुरक्षित नहीं महसूस कर पा रही हैं। लेकिन उनकी इच्छा एवरेस्ट के शिखर पर भारत के झंडे को फहराना है। 


गौरतलब हो कि, बिहार में पर्वतारोहण के लिए कोई ट्रेनिंग सेंटर ही कार्यरत नहीं है। ऐसे में बिहार के लोगों को पर्वतारोहण की ट्रेनिग लेने के लिए दूसरे राज्य का सहारा लेना पड़ता है। जिसमें यहां के बेटे- बेटियां काफी पिछड़ जाती है। ऐसे में लक्ष्मी झा ने अपने जुनून और सपने को साकार करते हुए काला पत्थर पिक और माउंट एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंची है। वे कहती हैं कि अगर आर्थिक मदद मिले तो वे एक दिन एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचकर तिरंगा को जरूर फराएंगी।

रिपोर्टिंग
R

रिपोर्टर

RITESH HUNNY

FirstBihar संवाददाता