Bihar Tourism: रोहतासगढ़ किले तक रोपवे से पहुंचने का इंतजार कर रहे पर्यटकों को अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ेगा. रोपवे का निर्माण दोबारा शुरू करने से पहले इसकी तकनीक और डिजाइन में बदलाव किया जा रहा है, ताकि आगे किसी तरह की घटना या दुर्घटना की स्थिति न बने. करीब 13.65 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस रोपवे की तकनीकी जांच आईआईटी पटना की टीम कर चुकी है.
कैमूर पहाड़ी पर करीब 1400 फीट की ऊंचाई पर स्थित रोहतासगढ़ किले और चौरासन मंदिर तक पर्यटकों की पहुंच आसान बनाने के लिए 1324 मीटर लंबे रोपवे का निर्माण किया जा रहा है. करीब दस महीने पहले ट्रायल के दौरान रोपवे का एक हिस्सा गिर गया था. इसके बाद निर्माण की गुणवत्ता, तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे.
घटना के बाद आईआईटी पटना की टीम को तकनीकी जांच के लिए लगाया गया. करीब एक माह पहले टीम ने स्थल का निरीक्षण कर रोपवे के पिलरों के निर्माण की तकनीक में बदलाव का सुझाव दिया. अब आईआईटी के सुझाव के आधार पर संशोधित डिजाइन और नई तकनीक से पिलरों का निर्माण किया जाएगा.
पिलर की मजबूती के लिए लगाए जाएंगे स्टील एंकर बार
नए डिजाइन के तहत अब पिलर के लिए निर्धारित गहराई तक खुदाई करने के बाद स्टील के एंकर बार लगाए जाएंगे. इसके बाद पिलर का निर्माण किया जाएगा. एंकर बार का इस्तेमाल किसी संरचना या कंक्रीट को उसकी नींव से मजबूती से जोड़ने के लिए किया जाता है.
पिलरों में अब रुखरे सरिया का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सरिया और कंक्रीट के बीच बेहतर पकड़ बनेगी. पहले पिलरों के निर्माण में चिकने सरिया के इस्तेमाल की बात सामने आई थी. निर्माण कार्य की निगरानी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से तय की गई कंसल्टेंसी करेगी.
सुरक्षा जांच के बाद दोबारा शुरू होगा काम
रोपवे के एक हिस्से के गिरने के बाद अब निर्माण में सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दी जा रही है. नई तकनीक और संशोधित डिजाइन को लागू करने के बाद ही निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा. इसका मकसद रोपवे को भविष्य में पर्यटकों के लिए सुरक्षित बनाना है.
एक सप्ताह पहले डीएम दीपक कुमार मिश्र ने भी अधिकारियों की टीम के साथ रोपवे स्थल का निरीक्षण किया था. उन्होंने वहां की भौगोलिक स्थिति और निर्माण से जुड़ी तैयारियों की जानकारी ली.
डीएम ने बताया कि नई तकनीक और संशोधित डिजाइन के साथ रोपवे का निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा. निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाएगा.
रोहतासगढ़ किले की दुर्गम पहाड़ी तक पहुंच को आसान बनाने वाली इस परियोजना के पूरा होने के बाद पर्यटकों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है. फिलहाल तकनीकी बदलाव और सुरक्षा से जुड़ा काम पूरा होने तक पर्यटकों को रोपवे सेवा शुरू होने का इंतजार करना पड़ेगा.





