BIHAR: डॉक्टर के क्वार्टर से एक्सपायर्ड मेडिसिन बरामद, लाखों की जीवन रक्षक दवाएं कमरे में पड़ी हुई बेकार

मोतिहारी जिले के पताही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी आवास की सफाई के दौरान लाखों रुपये की एक्सपायर्ड दवाएं मिलीं। नए चिकित्सा प्रभारी डॉ. शंकर बैठा ने मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को देने की बात कही है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 21 Feb 2026 09:57:56 PM IST

बिहार न्यूज

जनता के पैसे की बर्बादी - फ़ोटो रिपोर्टर

MOTIHARI: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पताही में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। चिकित्सा प्रभारी के लिए आवंटित आवास की सफाई के दौरान एक कमरे से भारी मात्रा में दवाएं बरामद हुईं, जो पूरी तरह एक्सपायर पाई गईं। 


प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इन दवाओं की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। यह खुलासा न केवल प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जानकारी के अनुसार हाल ही में केंद्र पर नए चिकित्सा प्रभारी की नियुक्ति हुई है। 


प्रभार ग्रहण करने के बाद जब प्रभारी आवास की सफाई कराई गई, तब एक कमरे में दवाओं के कई कार्टन और पैकेट पड़े मिले। जांच में स्पष्ट हुआ कि वहां रखी सभी दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं। दवाओं का समय पर वितरण या उपयोग न कर उन्हें कमरे में छोड़ दिया गया, जिससे वे बेकार हो गईं।


मामला इसलिए और चिंताजनक है क्योंकि क्षेत्र के मरीज लंबे समय से अस्पताल में दवाओं की कमी की शिकायत करते रहे हैं। कई जरूरतमंदों को बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। ऐसे में सरकारी स्टॉक का इस तरह नष्ट हो जाना सीधे तौर पर मरीजों के अधिकारों और सरकारी धन की बर्बादी से जुड़ा मुद्दा बन गया है। 


वर्तमान चिकित्सा प्रभारी डॉ. शंकर बैठा ने बताया कि उन्हें हाल ही में जिम्मेदारी सौंपी गई है और पूर्व प्रभारी द्वारा पूर्ण रूप से प्रभार हस्तांतरण अभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि आवास की सफाई के दौरान ही दवाएं मिलीं और सभी एक्सपायर थीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दी जाएगी, ताकि जांच कर उचित कार्रवाई की जा सके।


स्थानीय लोगों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर दवाओं का वितरण हुआ होता तो मरीजों को राहत मिलती और सरकारी संसाधनों की बर्बादी नहीं होती। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि इस गंभीर लापरवाही पर कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई होती है।