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नकली पेट्रोल कांड की जांच पर उठे सवाल, सैंपल सीलिंग से लेकर जांच प्रक्रिया तक में गड़बड़ी के आरोप

Fake Petrol Case: मोतिहारी के अरेराज में नकली पेट्रोल मामले की जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शंभू एंड संस पेट्रोल पंप के निरीक्षण के बाद प्रशासन ने ईंधन के सैंपल जांच के लिए लैब भेजने की बात कही, लेकिन सैंपल सीलिंग और जांच रिपोर्ट...

नकली पेट्रोल कांड की जांच पर उठे सवाल, सैंपल सीलिंग से लेकर जांच प्रक्रिया तक में गड़बड़ी के आरोप
Ramakant kumar
4 मिनट

Fake Petrol Case: मोतिहारी के गायघाट स्थित शंभू एंड संस इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर नकली पेट्रोल के मामले में प्रशासन की ओर से की गई जांच के बाद अब जांच प्रक्रिया को लेकर ही सवाल उठने लगे हैं. अरेराज अनुमंडल प्रशासन की टीम ने पेट्रोल पंप का संयुक्त निरीक्षण कर पेट्रोल, डीजल, XP95 और ग्रीन डीजल के सैंपल लिए हैं. प्रशासन के अनुसार इन सैंपलों को विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है.


अरेराज के अनुमंडल पदाधिकारी और कार्यपालक दंडाधिकारी की मौजूदगी में हुई जांच के दौरान ईंधनों का फिल्टर टेस्ट और स्पेसिफिक डेंसिटी टेस्ट किया गया. प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक दोनों परीक्षण प्रथम दृष्टया सही पाए गए. इसके अलावा मापन यंत्र से तेल की मात्रा की जांच की गई और शुरुआती भंडार तथा जांच के समय मौजूद स्टॉक का भी मिलान किया गया.


प्रशासन की जांच रिपोर्ट में कई बिंदुओं को सही पाए जाने की बात कही गई है, लेकिन इसी जांच प्रक्रिया से जुड़े कुछ ऐसे सवाल सामने आए हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है.


सैंपल सील हुआ, लेकिन हस्ताक्षर किसके हैं?

जांच के दौरान पेट्रोल और डीजल के सैंपल लिए गए और उन्हें सील भी किया गया. सवाल यह है कि सील किए गए इन सैंपलों पर किसी संबंधित व्यक्ति या अधिकारी के हस्ताक्षर लिए गए या नहीं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार सैंपल की सीलिंग के बाद उस पर किसी के हस्ताक्षर नहीं कराए गए.


ऐसे में जांच के लिए भेजे गए सैंपल की पहचान और उसकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. अगर सैंपल की सीलिंग के समय संबंधित अधिकारियों या अन्य मौजूद पक्षों के हस्ताक्षर नहीं हैं, तो बाद में सैंपल की प्रमाणिकता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं. यही वजह है कि अब यह पूछा जा रहा है कि सैंपल को सुरक्षित रखने और उसकी पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही.


मैनुअल और ऑटोमेशन जांच में अंतर

पेट्रोल पंप पर मैनुअल और ऑटोमेशन तरीके से पेट्रोल और डीजल की जांच भी की गई. बताया जा रहा है कि दोनों तरीकों से की गई जांच में अंतर सामने आया था. यह अंतर जांच के दौरान दर्ज भी किया गया, लेकिन प्रशासन की ओर से जारी प्रेस नोट में इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया.


ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जांच के दौरान किसी अंतर की जानकारी सामने आई थी, तो उसे सार्वजनिक की गई जानकारी में शामिल क्यों नहीं किया गया. इस अंतर की वजह क्या थी और इसका ईंधन की गुणवत्ता से कोई संबंध है या नहीं, यह स्पष्ट होना बाकी है.


मामले में इंडियन ऑयल के सेल्स ऑफिसर राहुल के बयान ने भी एक नया सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने बताया कि उनके जिम्मे करीब 85 पेट्रोल पंप हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों में उन्होंने गायघाट स्थित इस पेट्रोल पंप से एक बार भी सैंपल जांच के लिए नहीं लिया.


अब सवाल यह है कि 85 पेट्रोल पंपों की निगरानी की जिम्मेदारी होने के बावजूद दो साल तक इस पेट्रोल पंप से सैंपल जांच के लिए क्यों नहीं लिया गया. क्या निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी पेट्रोल पंपों से नियमित रूप से सैंपल लिए जाते हैं और अगर ऐसा है, तो गायघाट का यह पंप इस प्रक्रिया से बाहर कैसे रहा, यह भी जांच का विषय बन गया है.


फिलहाल प्रशासन की ओर से लिए गए पेट्रोल, डीजल, XP95 और ग्रीन डीजल के सैंपल प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं. लैब रिपोर्ट आने के बाद ही ईंधन की वास्तविक गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.