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पुलिस ने खोली वायरल वीडियो की पोल: जनता दरबार में झूठा दावा करने वाले का पर्दाफाश, DGP पर जमीन कब्जा करने का लगाया था आरोप

Bihar Police Action: पूर्वी चंपारण में वायरल वीडियो के जरिए जनता दरबार और पुलिस अधिकारियों पर जमीन कब्जाने के आरोप लगाने वाले व्यक्ति के दावों की पुलिस जांच में पड़ताल की गई। पुलिस ने जांच में आरोपों को भ्रामक बताया है।

Bihar Police Action
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Police Action: चंपारण प्रक्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक हरकिशोर राय के निर्देश और पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात की त्वरित व सख्त कार्रवाई से सोशल मीडिया पर जनता दरबार व वरीय अधिकारियों के खिलाफ चलाए जा रहे भ्रामक वीडियो का सच सामने आ गया है। 



डीआईजी हर किशोर राय और एसपी स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में कराई गई उच्चस्तरीय जांच में यह साफ हो गया है कि जनता दरबार में सुनवाई न होने का झूठा दावा करने वाला व्यक्ति दरअसल 47 लाख रुपये के गबन और पुराने जमीनी विवाद में अधिकारियों को दिग्भ्रमित करने की साजिश रच रहा था। पुलिस के दोनों वरीय अधिकारियों की अगुवाई में इस भ्रामक प्रचार का मजबूती से खंडन करते हुए पूरे मामले का सच उजागर कर दिया है।



डीआईजी हर किशोर राय द्वारा दिए गए निर्देश के तहत पुलिस उप-अधीक्षक (मुख्यालय), पुलिस उप-अधीक्षक (साइबर), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर-01) तथा अंचलाधिकारी (सदर) की संयुक्त चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। एसपी स्वर्ण प्रभात की देखरेख में कमेटी द्वारा सौंपी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि छतौनी निवासी हरेंद्र किशोर का मामला पूरी तरह से सिविल जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है। 



उक्त जमीन का इतिहास वर्ष 1925 से संबंधित है, जिसमें कोलाई ततवा और जुनाब मियां के वंशजों के बीच मालिकाना हक और दखल-कब्जे को लेकर विवाद चल रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि हरेंद्र किशोर ने इसी विवादित जमीन के नाम पर सत्यम कुमार नामक व्यक्ति से 47 लाख रुपये बयाना लिया और बाद में रजिस्ट्री करने से मुकर गया, जिसका मुकदमा भी न्यायालय में विचाराधीन है।



डीआईजी हर किशोर राय और एसपी स्वर्ण प्रभात की संयुक्त समीक्षा में यह तथ्य पूरी तरह प्रमाणित हुआ कि हरेंद्र किशोर ने 47 लाख रुपये के गबन के मामले से ध्यान भटकाने और दबाव बनाने के लिए जनता दरबार व प्रशासनिक अधिकारियों पर मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया था। 



अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जमीन की जमाबंदी भले ही हरेंद्र किशोर के नाम पर हो, लेकिन मौके पर भौतिक दखल-कब्जा हमेशा खतियानी वंशजों का रहा है, जिसका निपटारा केवल सक्षम न्यायालय द्वारा ही संभव है। डीआईजी हर किशोर राय और एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पुलिस प्रशासन की निष्पक्ष कार्यशैली को बदनाम करने वाले ऐसे भ्रामक व तथ्यहीन तत्वों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता