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Bihar News : उमानाथ घाट नाव हादसे के बाद एक्शन में प्रशासन, बिना रजिस्ट्रेशन वाली नावों पर लगेगा प्रतिबंध; लिखनी होगी ये जानकारियां

पटना के बाढ़ प्रखंड स्थित उमानाथ घाट पर हाल ही में हुए नाव हादसे के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। डीएम और एसएसपी ने उच्चस्तरीय बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब गंगा समेत किसी भी नदी में बिना निबंधन नावों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित

Bihar News : उमानाथ घाट नाव हादसे के बाद एक्शन में प्रशासन, बिना रजिस्ट्रेशन वाली नावों पर लगेगा प्रतिबंध; लिखनी होगी ये जानकारियां
Tejpratap
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Bihar News : बाढ़ प्रखंड के उमानाथ घाट पर हाल ही में हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद पटना जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। हादसे के मद्देनजर शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम और एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने जिले के सभी एसपी, एसडीओ, एसडीपीओ, अंचलाधिकारी, थानाध्यक्षों तथा जिला परिवहन पदाधिकारी के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर नाव परिचालन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।


बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब गंगा समेत जिले की किसी भी नदी में बिना निबंधन की नावों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। यदि कहीं भी गैर-निबंधित नाव चलती पाई गई तो उसे तत्काल जब्त किया जाएगा और नाविक के साथ-साथ नाव मालिक के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने पहले चरण में सभी नावों के निबंधन के लिए प्रखंडवार विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है।


डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नावों के निबंधन के बाद उनके सुरक्षित संचालन से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी अंचलाधिकारियों को नियमित निगरानी और निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


जिला प्रशासन ने बड़े घाटों पर एसडीओ और एसडीपीओ को नाव संचालकों और नाविकों के साथ बैठक कर नियमों की जानकारी देने तथा उनका अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। वहीं छोटे घाटों पर यह जिम्मेदारी अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष निभाएंगे। प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे नाव यात्रा के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करें और क्षमता से अधिक सवारियों वाली नावों में सफर न करें।


बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जिले के दीघा पाटीपुल घाट, पर्यटन घाट, जेपी सेतु पूर्वी घाट, मीनार घाट, कलेक्ट्रेट घाट, गांधी घाट, कंगन घाट, गायघाट, कच्ची दरगाह घाट, नासरीगंज घाट, हल्दी छपरा घाट, उमानाथ घाट और सीढ़ी घाट समेत कई स्थानों से बड़ी संख्या में लोग नावों के माध्यम से आवागमन करते हैं।


प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई नावों में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों के अलावा मवेशी और छोटे-बड़े वाहन भी लादे जा रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए प्रमुख घाटों पर जल्द ही आपदा प्रबंधन विभाग के नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे। इन नियंत्रण कक्षों में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, प्रशिक्षित गोताखोर और अन्य कर्मियों की तैनाती होगी। साथ ही पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लगातार सुरक्षा मानकों की जानकारी और जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे।


डीएम ने जिला परिवहन पदाधिकारी उपेंद्र पाल को अभियान चलाकर सभी नावों का निबंधन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके लिए अंचलवार रोस्टर तैयार किया जा रहा है। निबंधन से पहले मोटर यान निरीक्षक (एमवीआई) द्वारा नाव की वहन क्षमता, लाइफ जैकेट, लाइफ ब्वाय, फर्स्ट एड किट, रस्सी और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच की जाएगी। निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले नाव मालिकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि निबंधित नावों पर नाविक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, निबंधन संख्या, वहन क्षमता तथा प्रशिक्षित गोताखोर की जानकारी अंकित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा नाव पर पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट और अन्य बचाव उपकरण रखना भी जरूरी होगा।


जिलाधिकारी और एसएसपी ने संयुक्त रूप से निर्देश जारी करते हुए कहा कि सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी निजी या सरकारी नाव का संचालन नहीं किया जाएगा। आंधी, तूफान, तेज हवा अथवा खराब मौसम की स्थिति में नाव परिचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य नदी मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोकना है।