RJD की बैठक में ड्रामा: तेजस्वी ने विधायक दल का नेता बनने से कर दिया इंकार, संजय यादव चाणक्य के रोल में बने रहेंगे

बिहार में आरजेडी विधायक दल की बैठक के दौरान तेजस्वी यादव ने चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए नेता बनने से इंकार किया, जबकि लालू यादव और विधायकों के दबाव के बाद उन्होंने नेतृत्व संभालने पर सहमति दी। संजय यादव पर उठे सवालों का भी तेजस्वी ने बचाव किया

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Nov 17, 2025, 7:58:01 PM

बिहार

संजय यादव का बचाव - फ़ोटो REPORTER

PATNA: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद आरजेडी औऱ लालू परिवार में मचे घमासान के बीच आज पार्टी विधायक दल की बैठक में खूब ड्रामा हुआ. तेजस्वी यादव ने पार्टी की हार की जिम्मेवारी लेते हुए विधायक दल का नेता बनने से इंकार कर दिया. उन्होंने साफ साफ कहा कि संजय यादव को टारगेट करना गलत है. संजय यादव नहीं हार के लिए जिम्मेवार नहीं हैं. 


तेजस्वी ने नेता बनने से कर दिया इंकार 

आरजेडी के एक विधायक ने बताया कि बैठक में तेजस्वी यादव ने नेता प्रतिपक्ष का पद लेने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अब मैं पार्टी में एक विधायक रह कर काम करना चाहता हूं. उन्होंने कहा कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने आरजेडी को बनाया है. मैं उनके आदेश पर पार्टी का काम संभाल रहा हूं. मैने इस चुनाव में बहुत कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली. इसकी जिम्मेवारी लेते हुए मैं विधायक दल का नेता नहीं बनना चाहता.


ना लालू माने ना ही विधायक

तेजस्वी की पेशकश के बाद विधायक दल की बैठक में सन्नाटा पसर गया. लेकिन तभी लालू प्रसाद यादव ने बीच में हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा कि तेजस्वी ने पार्टी को मजबूत बनाने के लिए बहुत मेहनत की है. उसके बाद तमाम विधायकों ने कहा कि तेजस्वी यादव के हाथों में ही पार्टी की कमान होनी चाहिये. लालू यादव और विधायकों के समर्थन के बाद तेजस्वी यादव पार्टी विधायक दल का नेता बनने को तैयार हुए.  


संजय यादव चाणक्य बने रहेंगे

राजद विधायक दल की बैठक में तेजस्वी ने संजय यादव और अपनी टीम का जमकर बचाव किया. उन्होंने कहा कि संजय यादव और उनकी टीम ने जो काम किया है, वह मुझे पता है. पार्टी में किसने कितना मेहनत किया यह मै जानता हूं. मैंने सबके काम को देखा है. किसी के कुछ बोलने से और संजय यादव पर आरोप लगाने से कुछ नहीं होता है.


तेजस्वी ने कहा कि पार्टी में जब भी अच्छा करने की कोशिश होती है, उसका कुछ लोग विरोध करने लगते हैं. सवाल उठाने लगते हैं. जब जगदानंद सिंह को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था तो भी ऐसे ही सवाल उठाया गया था. जबकि जगदा बाबू पार्टी को अनुशासित करने और आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे. विपक्षी पार्टियों के इशारे पर ऐसे आरोप लगाये जाते हैं.