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रेरा बिहार का बड़ा एक्शन, बिल्डर ने घर खरीदार को 42 लाख रुपये लौटाए, वारंट वापस लेने से कोर्ट ने किया इनकार

रेरा बिहार के सर्टिफिकेट वाद में बिल्डर ने घर खरीदार को 42 लाख रुपये का भुगतान किया। ब्याज की बड़ी राशि बाकी होने पर अदालत ने बिल्डर का वारंट वापस लेने से इनकार किया।

बिहार न्यूज
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा), बिहार ने प्राधिकरण के आदेशों की अवहेलना करने वाले प्रमोटरों से बकाया राशि की वसूली के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत सर्टिफिकेट (नीलाम-पत्र) वादों के निष्पादन में तेजी लाई जा रही है। ये मामले बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 के प्रावधानों के तहत बकाया राशि की वसूली के लिए दायर किए जाते हैं।


इसी क्रम में 1 सितंबर 2026 को सर्टिफिकेट वाद संख्या 5684/2024-25 में चूककर्ता प्रमोटर ने शिकायतकर्ता विश्वजीत को 42 लाख रुपये का भुगतान किया। शिकायतकर्ता ने मां नारायणी भगवत डेवलपर के खिलाफ रेरा में शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में वर्ष 2022 में 42 लाख रुपये की राशि निर्धारित ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया गया था।


रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा), बिहार ने प्राधिकरण के आदेश की अवहेलना करने वाले प्रोमोटरों के विरुद्ध यह वसूली एक विशेष अभियान चला कर सर्टिफिकेट (नीलाम-पत्र) वादों के निष्पादन में तेजी लाई है। ये वाद बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 के प्रावधानों के अंतर्गत चूककर्ता बिल्डरों से बकाया राशि की वसूली हेतु दायर किए जाते हैं।


इसी क्रम में 1 सितम्बर को सर्टिफिकेट वाद संख्या  5684/2024-25  में चूककर्ता प्रोमोटर ने शिकायतकर्ता विश्वजीत को 42  लाख रुपये का भुगतान किया। शिकायतकर्ता ने माँ नारायणी भगवत डेवलपर  के विरुद्ध प्राधिकरण में शिकायत दायर की थी, जिस पर वर्ष 2022 में 42  लाख रुपये की राशि निर्धारित सूद सहित भुगतान का आदेश पारित किया गया था।


बिल्डर द्वारा भुगतान न किए जाने पर शिकायतकर्ता ने उसी वर्ष निष्पादन वाद दायर किया, जिसका निपटारा वर्ष 2023 में बकाया राशि की वसूली हेतु सर्टिफिकेट वाद दायर करने के निर्देश के साथ किया गया। सर्टिफिकेट वाद के अनुसार बिल्डर  को शिकायतकर्ता को मूलधन के रूप में 42 लाख रुपये एवं सूद के रूप में 52.47 लाक रुपये  लौटने हैं । मामले की  की सुनवाई में प्रोमोटर के लगातार अनुपस्थित रहने पर उसके विरुद्ध वारंट निर्गत किया गया।


 तत्पश्चात प्रमोटर ने प्राधिकरण के सर्टिफिकेट पदाधिकारी श्री अनिमेष पांडेय की अदालत को सूचित किया कि वो मूल राशि तत्काल  डिमांड ड्राफ्ट में माध्यम से भुगतान करने को तैयार है। कार्यवाही के दौरान प्रोमोटर ने अदालत में शिकायतकर्ता को उक्त  राशि का डिमांड ड्राफ्ट सौंपा तथा निवेदन किया की उसके विरुद्ध  जारी वारंट को वापस ले लिया जाए। 


शिकायतकर्ता द्वारा इसका विरोध किया  तथा कहा कि बकाया सूद की राशि किश्तों में देने का निर्देश दिया  जाए।  तत्पश्चात बिल्डर के  वकील ने अदालत से समय माँगा । दोनों पक्षों के दलील को सुनाने के बाद  अदालत ने यह निर्देश दिया  कि चुकी सर्टिफिकेट राशि (जिसमे सूद भी शामिल है) के आधे से अधिक राशि का भुगतान अभी बाकी है अतः बिल्डर के विरुद्ध जारी वारंट को अभी वापस नहीं लिया जा सकता । 


अदालत ने यह भी निर्देश दिया की अगर दोनों पक्ष आपसी सहमती से शेष राशि के भुगतान हेतु किसी परस्पर स्वीकार्य समझौते पर राजी होते हों तो अदालत में उपस्थित होकर इससे सम्बंधित कागज़ जमा कर सकते हैं । इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितम्बर  को होगी। उल्लेखनीय है कि अनिमेष पांडेय रेरा बिहार में सचिव के पद पर कार्यरत हैं।


घर खरीदारों को राहत प्रदान करने की दृष्टि से रेरा बिहार ने अपने वरीय पदाधिकारियों को सर्टिफिकेट पदाधिकारी के रूप में अधिसूचित कराया है तथा उनकी अदालतें प्राधिकरण के परिसर में ही संचालित होती हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी प्रोमोटर द्वारा शिकायत एवं निष्पादन वादों में पारित आदेशों का अनुपालन न किए जाने की स्थिति में घर खरीदारों को अपनी देय राशि की वसूली हेतु किसी अन्य मंच पर जाने की आवश्यकता न पड़े।

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