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BIHAR NEWS : 'ए नीतीश भाई ! कृपया ये काम जल्दी से जल्दी करो हो ...', 10 सर्कुलर रोड की पूरी कहानी; जब लालू के आग्रह पर बदला था कानून; पढ़िए यह ख़ास कहानी

राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड बंगले की पूरी कहानी जानिए। 2010 में लालू यादव के आग्रह पर कानून कैसे बदला, हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब क्यों खाली करना पड़ रहा है आवास।

BIHAR NEWS : 'ए नीतीश भाई ! कृपया ये काम जल्दी से जल्दी करो हो ...', 10 सर्कुलर रोड की पूरी कहानी; जब लालू के आग्रह पर बदला था कानून; पढ़िए यह ख़ास कहानी
Tejpratap
Tejpratap
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पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास सबसे ज्यादा चर्चा में है। यही वह बंगला है, जो वर्षों तक पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास रहा और जहां से लालू परिवार की राजनीति की कई बड़ी रणनीतियां तय होती रहीं। लेकिन इस बंगले की कहानी केवल एक सरकारी आवास की नहीं, बल्कि राजनीति, सत्ता, कानून और बदलते समय की भी है।


इस कहानी की शुरुआत साल 2010 से होती है। उस वर्ष हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राबड़ी देवी ने राघोपुर और सोनपुर—दोनों सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों जगह उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि अब वह 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में कैसे रहेंगी, क्योंकि उस समय बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं था।


वरिष्ठ पत्रकार दिवंगत अरुण कुमार सिन्हा ने अपनी चर्चित पुस्तक "नीतीश कुमार और उभरता बिहार" में इस पूरे घटनाक्रम का दिलचस्प उल्लेख किया है। किताब के अनुसार, राबड़ी देवी के चुनाव हारने के बाद राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव लगातार तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से एक विशेष कानून बनाने का आग्रह कर रहे थे।


किताब में उल्लेख है कि लालू यादव अक्सर नीतीश कुमार को फोन करते और कहते, "ऐ भाई नीतीश! कृपया ये काम जल्दी से जल्दी करो।" उनका आग्रह था कि बिहार में भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को उसी तरह आजीवन सरकारी आवास मिले, जैसी सुविधा पूर्व प्रधानमंत्रियों को दी जाती थी।


हालांकि, नीतीश कुमार शुरुआत में इस प्रस्ताव को लेकर सहज नहीं थे। उनके करीबी सहयोगियों के हवाले से किताब में बताया गया है कि नीतीश का मानना था कि ऐसा कानून बनाने से जनता के बीच गलत संदेश जाएगा और यह राजनीतिक रूप से भी उचित नहीं माना जाएगा। इसलिए उन्होंने लंबे समय तक इस मांग को टालने की कोशिश की।


लेकिन लगातार हो रहे आग्रह के बाद आखिरकार सरकार ने कानून बनाने का फैसला किया। वर्ष 2010 में बिहार स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (संशोधन) अधिनियम के जरिए पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। इसी कानून में एक महत्वपूर्ण प्रावधान भी जोड़ा गया कि यदि पति और पत्नी दोनों पूर्व मुख्यमंत्री हैं तो उन्हें अलग-अलग नहीं, बल्कि केवल एक ही सरकारी बंगला मिलेगा।


यही वह कानूनी बदलाव था, जिसने राबड़ी देवी के लिए 10, सर्कुलर रोड में बने रहने का रास्ता खोल दिया। चूंकि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी दोनों पूर्व मुख्यमंत्री हैं, इसलिए इस प्रावधान के तहत उन्हें एक सरकारी आवास आवंटित किया गया और 10, सर्कुलर रोड उनका स्थायी पता बना रहा। करीब नौ वर्षों तक सब कुछ सामान्य चलता रहा, लेकिन वर्ष 2019 में इस कहानी ने नया मोड़ ले लिया। 


पटना हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देने वाले प्रावधान को समाप्त कर दिया। अदालत के फैसले के बाद राज्य सरकार को नई व्यवस्था लागू करनी पड़ी। बाद के वर्षों में राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते 39, हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया। हालांकि, राबड़ी देवी ने तो पुराने बंगले को खाली कर दिया लेकिन नए बंगले में शिफ्ट होगी या नहीं इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। ई। इसी वजह से यह मामला अब केवल सरकारी आवास तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। सत्ता पक्ष इसे आदेश और सरकारी नियमों के पालन का मामला बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देख रहा है।


दिलचस्प बात यह है कि जिस बंगले को बचाने के लिए कभी कानून बनाया गया था, आज वही बंगला न्यायालय के फैसले और बदले हुए नियमों के कारण खाली हो गया है। एक दौर में सत्ता की मजबूरी ने कानून का रास्ता बनाया था, तो दूसरे दौर में न्यायिक हस्तक्षेप ने उसी व्यवस्था को बदल दिया। यही वजह है कि 10, सर्कुलर रोड का यह सरकारी आवास आज भी बिहार की राजनीति की सबसे चर्चित और प्रतीकात्मक कहानियों में शामिल है।