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PM Awas Yojana Bihar : 'PM आवास का लाभ देने के लिए आवास सहायक मांगते हैं पैसे ....', BJP विधायक ने मंत्री का पसीना छुड़ाया, जानिए मंत्री ने फिर क्या कहा

बिहार विधानसभा में पीएम आवास योजना में अवैध वसूली, असर्वेक्षित भूमि पर बसे गरीबों और डिस्प्यूटेड सूची को लेकर सरकार से जवाब तलब।

PM Awas Yojana Bihar : 'PM आवास का लाभ देने के लिए आवास सहायक मांगते हैं पैसे ....', BJP विधायक ने मंत्री का पसीना छुड़ाया, जानिए मंत्री ने फिर क्या कहा
Tejpratap
Tejpratap
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PM Awas Yojana Bihar : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर कई अहम मुद्दे उठाए गए। सदन में भाजपा विधायक के तरफ से ही यह गंभीर आरोप लगाया गया कि जिन लाभुकों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृति मिल चुकी है, उनसे घर-घर जाकर अवैध वसूली की जा रही है। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इस अवैध वसूली का वीडियो भी उनके पास उपलब्ध है और इसकी निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए। इसके साथ ही आवास योजना में लाभुकों के चयन में हो रही गड़बड़ी का मुद्दा रीगा विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने उठाया। उन्होंने पूछा कि विकास मित्रों की तरफ़ से इसमें गड़बड़ी कराई गई है । इसके अलावा बिहारशरीफ के विधायक और गोपालगंज विधायक मिथिलेश तिवारी ने बताया कि इस योजना के तहत गड़बड़ी की जा रही है। आवास लाभुकों से पैसा वसूला जा रहा है। आवास लाभुको से 25% वसूला जा रहा। इसके बाद मंत्री को जवाब देने में पसीने छुट गए। लेकिन उन्होंने यह कहा कि इसकी जानकारी दें दोषी के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई कराई जाएगी।


दरअसल, बिहार शरीफ के विधायक सुनील कुमार ने कहा कि हमारे लिए में कई लोगों से जिन्हें पीएम आवास योजना का लाभ मिला है उनसे आवास सहायक अवैध वसूली कर रहे हैं। इसका वीडियो भी मेरे पास मौजूद हैं। इतना ही नहीं भाजपा विधायक मिथलेश तिवारी ने कहा कि मेरे पास भी एक शिकायत आई थी की आवास सहायक तीस हज़ार रुपए का डिमांड किया जा रहा है। इसका वीडियो भी मेरे पास आया तो मैंने इसको लेकर डीएम और तमाम अधिकारी से बात किया लेकिन अभी तक आवास सहायक पर एक्शन नहीं हुआ ? 


इतना ही नहीं भाजपा के विधायक सुनील कुमार ने यह भी कहा कि बिहार शरीफ शहर की लगभग 60 प्रतिशत भूमि असर्वेक्षित है। उन्होंने बताया कि अशर-विच्छेद भूमि पर पिछले 200 वर्षों से गरीब परिवार बसे हुए हैं, लेकिन नियमों के कारण उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा गया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। विधायक ने सवाल उठाया कि जिन गरीबों के पास 50 वर्षों से अधिक समय से नगर निगम की रसीद है, क्या उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाएगा? उन्होंने सरकार से इस पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।


इसके अलावा झंझारपुर के विधायक नीतीश मिश्रा ने राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वेक्षण को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के बाद दो तरह की सूची तैयार की गई है। पहली श्रेणी ‘एक्सेप्टेड’ की है, जिसमें उन लाभुकों के नाम शामिल हैं जिन्हें भारत सरकार के पोर्टल पर स्वीकार कर लिया गया है और जांच में सही पाया गया है। दूसरी श्रेणी ‘डिस्प्यूटेड’ की है, जिसमें कई पंचायतों में नामों की संख्या अधिक पाई गई। उदाहरण के तौर पर किसी पंचायत में 1500 नाम थे, जिनमें से जांच के बाद 700 नाम स्वीकृत किए गए और 800 नामों को विवादित श्रेणी में रखा गया। उन्होंने कहा कि इन नामों की दोबारा जांच कराई जाएगी ताकि कोई भी योग्य लाभार्थी वंचित न रह जाए।


विभागीय मंत्री श्रवण कुमार ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी गरीब व्यक्ति योजना से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि सूची तैयार हो चुकी है और उसकी जांच प्रक्रिया जारी है। मंत्री ने यह भी कहा कि सर्वेक्षण के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील की गई थी। यदि किसी क्षेत्र में गड़बड़ी हुई है तो स्थानीय प्रतिनिधियों को भी इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और सुधार के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत विवादित नामों की पुनः जांच कर उचित लाभुकों को योजना का लाभ दिलाया जाएगा। इसके अलावा जो भी आवास सहायक गलत काम कर रहे हैं तो एक्शन होगा।