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Patna Water Metro : पटना में जल्द शुरू होगी वाटर मेट्रो, पहले फेज में गांधी घाट और इस जगह होगा पड़ाव; गंगा घाटों पर बन रहे चार्जिंग प्वाइंट

पटना में गंगा नदी पर वाटर मेट्रो प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। गांधी घाट, कंगन घाट और दीघा घाट पर चार्जिंग प्वाइंट बन रहे हैं, 10.5 किमी का पहला रूट होगा।

Patna Water Metro : पटना में जल्द शुरू होगी वाटर मेट्रो, पहले फेज में गांधी घाट और इस जगह होगा पड़ाव; गंगा घाटों पर बन रहे चार्जिंग प्वाइंट
Tejpratap
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Patna Water Metro : पटना को जल्द ही एक नई और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की सौगात मिलने वाली है। गंगा नदी पर प्रस्तावित वाटर मेट्रो परियोजना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसके तहत नदी किनारे कई घाटों पर चार्जिंग प्वाइंट बनाने का काम शुरू कर दिया गया है, ताकि वाटर मेट्रो के इंजन को परिचालन के दौरान आसानी से चार्ज किया जा सके।


पर्यटन विभाग के अनुसार, फिलहाल गांधी घाट पर चार्जिंग प्वाइंट के निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। इसके अलावा कंगन घाट और दीघा घाट पर भी चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इन चार्जिंग प्वाइंट की मदद से वाटर मेट्रो की बोट को चार्ज किया जाएगा, जिससे पर्यावरण के अनुकूल और सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध हो सकेगी।


परियोजना के पहले चरण में वाटर मेट्रो का सफर करीब 10.5 किलोमीटर लंबा होगा। इस चरण में गांधी घाट और गायघाट को मुख्य पड़ाव के रूप में विकसित किया जा रहा है। यात्रियों और पर्यटकों को गंगा नदी के किनारे बसे प्रमुख घाटों के बीच तेज, सुरक्षित और आरामदायक जल परिवहन की सुविधा मिलेगी।


दूसरे चरण में इस परियोजना का विस्तार करते हुए हाजीपुर और सोनपुर तक वाटर मेट्रो चलाने की योजना है। इससे पटना के साथ-साथ वैशाली और सारण जिले के लोगों को भी लाभ मिलेगा और नदी के जरिए आवागमन का नया विकल्प तैयार होगा।


पर्यटकों और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में दो पर्यावरण अनुकूल वाटर मेट्रो बोट चलाई जाएंगी। ये बोट हाइब्रिड मोड पर काम करेंगी, यानी इनमें आधुनिक बैट्री तकनीक के साथ-साथ बैकअप के लिए जेनरेटर की भी व्यवस्था होगी। इससे बिजली खत्म होने की स्थिति में भी बोट सुरक्षित तरीके से चल सकेगी।


सुरक्षा और आपातकालीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए तीन से चार रेस्क्यू बोट भी तैनात की जाएंगी। इसके अलावा हर बोट में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यात्रियों की निगरानी और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और ऑटोमेटिक बोट लोकेशन सिस्टम भी रहेगा, जिससे कंट्रोल रूम से बोट की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी।


गर्मी के मौसम में यात्रियों को आरामदायक सफर मिले, इसके लिए सभी बोट को पूरी तरह एसी युक्त बनाया जा रहा है। साथ ही इनका डिजाइन इस तरह तैयार किया जा रहा है कि तेज गति में चलने के बावजूद नदी में कम लहरें पैदा हों, जिससे यात्रा ज्यादा सुरक्षित और स्थिर बनी रहे।


पटना वाटर मेट्रो में जिस मुख्य बोट का इस्तेमाल किया जाएगा उसका नाम “एमवी-गोमधर कुंवर” रखा गया है। इस आधुनिक बोट की कीमत 12 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। पूरी पटना वाटर मेट्रो परियोजना की कुल लागत करीब 908 करोड़ रुपए आंकी गई है।


यह परियोजना भारत सरकार की इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया और बिहार सरकार का संयुक्त प्रयास है। इसके निर्माण और तकनीकी विकास में कोच्चि स्थित जहाज निर्माण केंद्र के इंजीनियरों से भी तकनीकी सहायता ली जा रही है, ताकि बोट और घाटों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जा सके।


पटना वाटर मेट्रो का पहला रूट दीघा घाट से कंगन घाट के बीच विकसित किया जा रहा है, जो लगभग 10.5 किलोमीटर लंबा होगा। यह रूट कंगन घाट से शुरू होकर गायघाट, गांधी घाट, दीघा घाट, फरक्का महतो घाट, नारियल घाट, पानापुर, कोंहरा घाट, काली घाट (सोनपुर) और छेछर घाट तक जाएगा।


भविष्य में इस परियोजना का विस्तार करते हुए इसे 10 टर्मिनल और चार अलग-अलग रूट तक विकसित करने की योजना है। इससे पटना के साथ-साथ आसपास के जिलों जैसे वैशाली और छपरा के प्रमुख क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा।


सरकार का मानना है कि वाटर मेट्रो शुरू होने के बाद न केवल यातायात का दबाव कम होगा, बल्कि गंगा नदी के किनारे पर्यटन को भी नई गति मिलेगी और लोगों को एक अलग तरह का आधुनिक और रोमांचक सफर करने का अवसर मिलेगा।