Bihar News: पटना में लोन की किस्तें चुकाने में चूक होने पर बाइक जब्त करना एक फाइनेंसर को महंगा पड़ गया। वाहन जब्त करने से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने फाइनेंसर के खिलाफ फैसला सुनाया है।
आयोग ने शिकायतकर्ता सौरभ राज की बाइक की पूरी सर्विसिंग कराकर उसे चालू हालत में लौटाने के साथ मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार की पीठ ने यह फैसला सुनाया। आदेश के अनुसार, यदि फाइनेंसर बाइक की सर्विसिंग कराकर उसे चालू हालत में लौटाने में विफल रहता है, तो उसे वाहन की लागत के मद में 50 हजार रुपये देने होंगे।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 120 दिनों के भीतर बाइक शिकायतकर्ता को लौटाई जाए। निर्धारित अवधि के बाद आदेश का अनुपालन नहीं होने पर तीन महीने बाद से वास्तविक भुगतान या वाहन की सुपुर्दगी तक देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी लागू होगा।
मामले के अनुसार, सौरभ राज ने 31 जुलाई 2013 को बजाज पल्सर 130 सीसी बाइक खरीदी थी। इसके लिए उन्होंने फाइनेंसर से 65 हजार रुपये का ऋण लिया था। इस राशि को 3,245 रुपये की 20 समान मासिक किस्तों में चुकाना था।
किस्तों के भुगतान में चूक होने पर 18 अगस्त 2014 को फाइनेंसर ने संबंधित लोगों के माध्यम से बाइक जब्त कर ली। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बाइक जब्त करने से पहले उन्हें जरूरी नोटिस नहीं दिया गया और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वाहन जब्त करने से पहले बकाया राशि की मांग का नोटिस, ऋण की शेष राशि की एकमुश्त अदायगी के लिए लोन रिकॉल नोटिस और वाहन जब्त करने के आशय से संबंधित नोटिस की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। आयोग के समक्ष फाइनेंसर वाहन जब्त करने के आशय से जारी नोटिस प्रस्तुत नहीं कर सका। इसे सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने शिकायत स्वीकार कर ली और शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
आयोग ने फाइनेंसर को बाइक की पूरी सर्विसिंग कराकर उसे चालू हालत में शिकायतकर्ता को सौंपने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने को कहा गया है।
यदि फाइनेंसर निर्धारित समय में बाइक लौटाने में विफल रहता है, तो उसे वाहन की लागत के मद में 50 हजार रुपये देने होंगे। आदेश का समय पर पालन नहीं होने की स्थिति में निर्धारित शर्तों के अनुसार 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।




