1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 22, 2025, 10:24:29 AM
पटना न्यूज - फ़ोटो GOOGLE
Patna News: बिहार की राजधानी पटना के 21 अंचलाधिकारियों पर दाखिल-खारिज मामलों को समय पर निपटाने में देरी के आरोप लगे हैं, जिसके चलते प्रशासन ने जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि जो भी अंचलाधिकारी 75 दिनों से अधिक समय तक मामले लंबित रखेंगे, उनके विरुद्ध प्रति लंबित मामले 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस संबंध में एडीएम राजस्व अनिल कुमार को लंबित मामलों की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिले में वर्तमान में कुल 694 मामले 75 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं, जिनमें संपतचक अंचल में 290, दीदारगंज में 118, बिहटा में 68, दानापुर में 44, और फुलवारीशरीफ में 43 मामले शामिल हैं। पटना जिले में दाखिल-खारिज मामलों का 98.27 प्रतिशत निपटान हो चुका है, लेकिन शेष मामलों में देरी पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई।
डीएम ने अथमलगोला, खुशरूपुर, मनेर और पंडारक अंचलों के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन इलाकों में 75 दिन से अधिक समय तक कोई लंबित मामला नहीं है। उन्होंने इन अंचलों के अधिकारियों को उदाहरण प्रस्तुत किया।
सख्त कार्रवाई के तहत, डीएम ने पांच सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राजस्व कर्मचारियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इनके खिलाफ विधिवत निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, जिला स्तर पर 10 सबसे पुराने लंबित वादों की समीक्षा कर एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। जो अधिकारी इस मामले में लापरवाही करेंगे, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अम्बेडकर समग्र सेवा अभियान के तहत वास भूमि बंदोबस्ती के लिए अब तक 3,226 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अधिकारियों को 15 दिनों के अंदर कम से कम 50 प्रतिशत आवेदनों का निष्पादन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भूमिहीन लोगों को विधिवत बंदोबस्ती मिल सके। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों जैसे मनेर, पंडारक, खुशरूपुर, और अथमलगोला में भी बेहतर कार्य की प्रशंसा की गई है, जहां दाखिल-खारिज मामले समय पर निपटाए जा रहे हैं।
इस फैसले से प्रशासन का उद्देश्य राजस्व विभाग में तेजी लाना और लंबित मामलों को खत्म कर लोगों को शीघ्र सेवा देना है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी जवाबदेह बनें और शिथिलता से बचें। जिला प्रशासन ने जुर्माने की राशि वसूली के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही इसका प्रभाव दिखने लगेगा।