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Patna Airport News : पटना एयरपोर्ट पर आखिर क्यों मंडरा रहा बर्ड हिट का खतरा? मांस-मछली की दुकानें और कचरा स्टेशन भी जांच के दायरे में...

पटना एयरपोर्ट पर विमानों से पक्षियों के टकराने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। पिछले साल 32 बर्ड हिट दर्ज हुए, जबकि इस साल सितंबर तक 22 मामले सामने आ चुके हैं। ब्लैक काइट यानी चील से खतरा कम करने के लिए अब रिफ्लेक्टिव रिबन लगाने की तैयारी है।

Patna Airport News
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Tejpratap
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पटना : पटना एयरपोर्ट पर विमानों की सुरक्षित उड़ान के सामने पक्षियों की मौजूदगी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उड़ान भरते और लैंडिंग करते समय पक्षियों से विमानों के टकराने यानी बर्ड हिट की घटनाओं ने एयरपोर्ट प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इस खतरे को कम करने के लिए अब नए उपाय अपनाने की तैयारी की जा रही है। एयरपोर्ट के आसपास रिफ्लेक्टिव रिबन लगाए जाएंगे, ताकि उनकी चमक और प्रतिबिंब से पक्षियों को दूर रखने में मदद मिल सके। सबसे बड़ी चिंता ब्लैक काइट यानी चील को लेकर है, जिसकी मौजूदगी विमानों की सुरक्षित आवाजाही के लिए चुनौती बनी हुई है।


आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। पटना एयरपोर्ट पर पिछले साल पूरे वर्ष में बर्ड हिट की 32 घटनाएं दर्ज की गई थीं। वहीं, इस साल सितंबर तक ही 22 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। यानी साल के नौ महीने में ही पिछले वर्ष की कुल घटनाओं के मुकाबले बड़ी संख्या में मामले सामने आ गए हैं। ऐसे में एयरपोर्ट प्रशासन पक्षियों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ उन्हें हवाई क्षेत्र से दूर रखने के उपायों पर काम कर रहा है।


बर्ड हिट की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एयरपोर्ट प्रशासन रिफ्लेक्टिव रिबन लगाने की योजना बना रहा है। इन रिबन की चमक और रोशनी के प्रतिबिंब से पक्षियों को संबंधित स्थानों से दूर रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। खासकर उन इलाकों में इस उपाय को उपयोगी बनाने की कोशिश होगी, जहां पक्षियों की आवाजाही अधिक रहती है।


हालांकि, रिफ्लेक्टिव रिबन लगाने से बर्ड हिट की घटनाओं में कितनी कमी आएगी, यह इसके इस्तेमाल और प्रभाव का आकलन करने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसके साथ ही पक्षियों को आकर्षित करने वाले कारणों की पहचान करना भी जरूरी माना जा रहा है। केवल एक उपाय के भरोसे इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना आसान नहीं होगा।


पटना एयरपोर्ट के आसपास ब्लैक काइट यानी चील की मौजूदगी को प्रमुख चिंता के रूप में देखा जा रहा है। बड़े आकार के पक्षियों की विमान से टक्कर उड़ान की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर हो सकती है। खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान विमान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर होता है। ऐसे में पक्षियों की मौजूदगी पायलट और एयरपोर्ट प्रबंधन के लिए चुनौती पैदा कर सकती है।


इस खतरे को समझने और उसके समाधान की दिशा तय करने के लिए वन विभाग के डीएफओ की ओर से बर्ड सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के दौरान पक्षियों की संख्या, उनकी आवाजाही, उनके ठहरने के स्थान और उन्हें भोजन उपलब्ध कराने वाले स्रोतों का आकलन किया जाएगा। रिपोर्ट से यह समझने में मदद मिलेगी कि एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों का जमावड़ा किन कारणों से हो रहा है।


पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी के पीछे एयरपोर्ट के आसपास मौजूद कुछ स्थानों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। चितकोहरा गोलंबर के पास स्थित मांस-मछली की दुकानों और गर्दनीबाग के गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन को ऐसे ही संभावित कारणों में शामिल किया जा रहा है। इन जगहों पर फेंके जाने वाले खाद्य अवशेष पक्षियों को आकर्षित कर सकते हैं। भोजन की उपलब्धता के कारण पक्षियों का यहां नियमित रूप से पहुंचना और आसपास मंडराना संभव है।


इसी वजह से बर्ड सर्वे में इन स्थानों की गतिविधियों और पक्षियों की आवाजाही के बीच संबंध का आकलन महत्वपूर्ण होगा। यदि सर्वे में ऐसे स्रोतों की पुष्टि होती है, तो उन्हें नियंत्रित करने और साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर बनाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।


अब सबकी नजर वन विभाग के सर्वे की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट आने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन और संबंधित विभाग पक्षियों की मौजूदगी कम करने के लिए जरूरी कदम तय कर सकेंगे। रिफ्लेक्टिव रिबन लगाने के साथ-साथ पक्षियों को आकर्षित करने वाले खाद्य स्रोतों पर नियंत्रण और संवेदनशील स्थानों की पहचान जैसे उपाय भी अहम हो सकते हैं।


पिछले साल 32 और इस साल सितंबर तक 22 बर्ड हिट की घटनाएं सामने आने के बाद चुनौती साफ है। अब देखना होगा कि रिफ्लेक्टिव रिबन और सर्वे के आधार पर तैयार की जाने वाली रणनीति पटना एयरपोर्ट पर पक्षियों के खतरे को कम करने में कितनी कारगर साबित होती है। लक्ष्य स्पष्ट है—विमानों की सुरक्षित उड़ान और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।